Tuesday, August 28, 2018

जब जैसा तब वैसा रे


२८ अगस्त २०१८ 
जीवन जब हमारे निकट मुस्कुराता हुआ गुनगुना रहा होता है, हम किन्हीं व्यर्थ की बातों में खोये उससे नजरें नहीं मिलाते. संत कहते हैं, परमात्मा चारों ओर उसी तरह मौजूद है जैसे हवा और धूप. खिड़कियाँ बंद हों तो धूप भला अंदर आये कैसे और हवा थोड़ी बहुत आ भी गयी तो उसे ताज़ी रखने के लिए भी तो खिड़कियाँ खोलनी होंगी. हवा को कैद नहीं कर सकते न ही धूप को...उन्हें तो वे जैसे हैं, जब हैं, उसी वक्त महसूस करना है, इसी तरह परमात्मा को हर क्षण को जैसा वह है वैसा ही स्वीकार कर ही महसूस किया जा सकता है. मन पर विचारों और विकारों के पर्दे लगे हों तो उसका प्रवेश सम्भव नहीं है.

Saturday, August 25, 2018

यह राखी बंधन है ऐसा


२५ अगस्त २०१८ 
इस जगत में कोई भी हृदय प्रेम से खाली नहीं, किन्तु उसे पूर्णता से महसूस करने के पल जीवन में कम ही आते हैं. कल श्रावणी पूर्णिमा है, यानि राखी का त्योहार, जिस दिन बहनें, भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बाँधती हैं. मस्तक पर रोली-अक्षत का तिलक और हाथ में आरती से सजी थाली, जिसमें जलता हुआ दीपक कहता है, उनके जीवन में सदा प्रकाश बना रहे. बहन के हाथ में मिष्ठान से भरी थाली और भाई के हाथ में उपहार, कितना सुंदर दृश्य उपस्थित हो जाता है. प्रेम को व्यक्त करना कितना कठिन है पर इन सारे बाहरी उपायों के द्वारा अंतर के पावन भावों को व्यक्त करना कितना सहज हो जाता है. मिठाई में यदि प्रेम की मिठास न घुली हो और उपहार भी यदि प्रेम से न दिया गया हो तो उत्सव मना ही नहीं, उत्सव की भावना भीतर जगाये बिना औपचारिकता ही निभाई गयी. इसीलिए हमारे पूर्वजों ने सभी उत्सवों को पवित्रता और उपवास से जोड़ दिया गया, सुबह स्नान आदि से शुद्ध होकर बिना मुख जुठाये बहन भाई के आगमन की राह देखती है, तो उसके अंतर में छुपी भावना हृदय में पनपने लगती है. किसी भी भाव को प्रकट होने के लिए अंतर में रिक्त स्थान तो चाहिए न, उत्सव के दिन शेष दिनों के सामान्य कार्यों से छुट्टी लेकर जब हम विशेष हर्ष का उपाय करते हैं तो उल्लास, प्रेम आदि के भाव सहज ही प्रकट होने लगते हैं.

Thursday, August 23, 2018

सुख-दुःख मन की ही कलियाँ हैं


२३ अगस्त २०१८ 
कितनी बार हमने ये शब्द नहीं सुने हैं, ‘हम अपने भाग्य के निर्माता स्वयं हैं’. भाग्य का अर्थ जीवन में केवल सुखद परिस्थितियाँ आना ही तो नहीं है. जो भी हमारे साथ घट रहा है, वह सब हमारे ही द्वारा रचा गया है. सुख को तो हम स्वयं की कृति मान सकते हैं, पर दुःख का कारण  स्वयं को नहीं मानते. यही बात है कि दुःख जीवन से कभी विदा ही नहीं लेता. अनजाने में हम स्वयं ही रोज-रोज इसकी नई-नई फसल बोते रहते हैं और हर बार इसका कारण किसी न किसी पर डाल देते हैं. जीवन में किसी ने कामयाबी हासिल की तो हम उसकी मेहनत और कठोर परिश्रम के कारण उसे बधाई देते हैं, इसी तरह जब कोई अपने जीवन में असफल हुआ, अस्वस्थ हुआ और दुखी हुआ, यदि उसी क्षण वह इसकी जिम्मेदारी भाग्य पर न डालकर स्वयं पर लेने की हिम्मत दिखाए, उसी क्षण से उसका भाग्य बदलने लगता है. हमारे मन का तनाव भी खुद का बनाया हुआ है और हमारे मन का उल्लास भी हमारी ही रचना है. जीवन हर क्षण एक सा है, हमारी दृष्टि जैसी होगी वह वैसा ही दिखाई देने वाला है. किसी के पास कुछ भी न हो पर उसका मन प्रसन्न रहने की कला जानता हो तो वह अभाव का अनुभव ही नहीं करेगा. किसी के पास सब कुछ हो और मन को खिलने की कला नहीं आती हो तो वह उस सुख को भी पीड़ा में बदल सकता है.

Sunday, August 19, 2018

पल-पल सजग रहेंं जीवन में


२० अगस्त २०१८ 
जीवन हर क्षण एक सा है, एक रस, सदा जीवंत, सदा भरपूर, उस सागर की तरह जो सदा ही जल से छलकता रहता है, कभी खाली नहीं होता. हमारा पात्र कितना बड़ा है, और हम उससे क्या चाहते हैं, यह तय करता है, कि जीवन हमारे लिए कैसा है. हमें पल-पल इसे गढ़ना है, पल-पल इसे संवारना है. इसकी देने की क्षमता अपार है, पर हमारी चाह छोटी सी है. विशाल हृदय हो तभी कोई अटल जी की तरह विरोधियों के मध्य रहकर भी अपना नाम अमर कर जाता है. हर घड़ी एक अनंत को अपने भीतर छिपाए है, जैसे अति सूक्ष्म परमाणु में अपरिमित शक्ति है, बिलकुल वैसे ही. अपने सामान्य जीवन की आपाधापी में हम इस सत्य को भुला बैठते हैं, और उस अनंत से वंचित रह जाते हैं. मन सीमित से संतुष्ट नहीं होता, उसे विस्तृत हुए बिना चैन नहीं मिलता, तभी आकाश की अनंतता उसे लुभाती है. जीवन से नजर मिलनी है तो वर्तमान क्षण की गहराई में उतरना होगा और मन के प्रांगण को उसके लिए खाली कर देना होगा.

Thursday, August 16, 2018

एक युग का अवसान


१७ अगस्त २०१८ 
भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी कल शाम हमारे बीच नहीं रहे. सारा देश इस महान नेता के निधन से शोक में ग्रस्त है. अटल जी की प्रशंसा किये बिना उनके विरोधी भी नहीं रह पाते थे. उनका जीवन भारत के उत्थान और विकास के लिए समर्पित था और उसमें किसी भी तरह की स्वार्थ भावना नहीं थी. उनका हृदय इतना विशाल था कि अपने विरोधियों के अच्छे कार्यों पर उन्हें बधाई देने में वे जरा भी नहीं हिचकते थे. कवि हृदय अटल जी संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देने वाले पहले भारतीय नेता थे. हर भारतीय को उनसे कुछ सीखने की आवश्यकता है. कश्मीर से कन्याकुमारी तक और उत्तर-पूर्व से गुजरात तक आज हर आँख उन्हें विदाई देते हुए नम है. वह भारत को विश्व में उसका खोया हुआ गौरव दिलाने के लिए कृत संकल्प थे. भारत के इतिहास में सदा के लिए उनका नाम सुनहरे शब्दों में अंकित रहेगा.  

Wednesday, August 15, 2018

मार्ग उसे जिस पल देंगे हम


१६ अगस्त २०१८ 
आत्मा रूप से परमात्मा हरेक के भीतर समान रूप से विद्यमान है. वह हमारे कर्मों द्वारा प्रकट होना चाहता है. संत उसे मार्ग दे देते हैं और हम उसके मार्ग में अड़ कर खड़े हो जाते हैं. हमारी कामनाएं उसके मार्ग में सबसे बड़ी बाधा हैं, ध्यान की गहराई में जब मन खो जाता है, वही वह रह जाता है. प्रकृति उसे सहज रूप से अभिव्यक्त होने दे रही है, इसी लिए इतनी आकर्षक प्रतीत होती है. नन्हे पंछी और शावक भी उसी को अभिव्यक्त कर रहे हैं और सुकोमल फूल भी. मानव का मन यदि स्वच्छ पानी की तरह निर्मल और हर पात्र में ढल जाने वाला हो, नमनीय हो, तो परमात्मा उसमें से स्वयं को व्यक्त कर सकता है. हमारा स्वभाव यदि पर्वत की तरह कठोर है, झुकना ही नहीं जानता हो तो श्वास से भी सूक्ष्म परमात्मा उसमें से कैसे प्रकटेगा.

Monday, August 13, 2018

स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर


१४ अगस्त २०१८ 
कल स्वतन्त्रता दिवस मनाया जायेगा, हर कोई प्रसन्न है और अपने तरीके से इस राष्ट्रीय उत्सव को मनाने की तैयारी कर रहा है. भारत का छोटे से छोटा प्रदेश हो या सुदूर कोने में स्थित कोई गाँव हो, किसी न किसी के द्वारा तिरंगा लहराया जायेगा. नीलगगन में लहराते हुए तिरंगे को देखकर हर भारतीय का हृदय एक अनजाने उल्लस से भर जाता है. इस देश में जन्म लेना कितना सौभाग्य से भरा है, इसका अहसास होता है. चाहे कोई विदेश में हो या देश में स्वतन्त्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस पर देश की याद दिल में किसी न किसी झरोखे से आ ही जाती है. देशभक्ति का कोई गीत कहीं बजता हो या टीवी पर लाल किले से प्रधान मंत्री के भाषण की कोई बात सुनाई दे जाये, मन कृतज्ञता से भर जाता है और हृदय में देशप्रेम की एक हिलोर जगने लगती है. राष्ट्र हमें एक सूत्र में बांधता है, एक पथ पर आगे ले जाता है, हमारे सुख-दुःख साझे हो जाते हैं, सीमा पर कोई संकट हो तो करोड़ों हृदय एक साथ उसका सामना करने के लिए तत्पर होते हैं. राष्ट्र की सीमाओं में हम स्वतंत्र हैं, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, अपने स्वप्नों को पूर्ण करने के लिए, अपने भीतर की सोयी हुई शक्तियों को जगाकर देश को हर दृष्टि से समर्थ बनाने के लिए. हर भारतीय हमारा अपना है, इस बात का अहसास विदेश में किसी भारतीय को देखकर कितनी शिद्दत से होता है. आइये इस आजादी के जश्न को मनाते हुए हम अपने उन लाखों भाई-बहनों को भी याद करें, जिन्होंने अपने श्रम और भावनाओं से इस भारत भूमि को सींचा है, उन्हें भी जो युद्ध भूमि पर शहीद हुए. देश की आजादी में अपना योगदान देने वाले सभी संतों, महापुरुषों, लेखकों, कवियों, और वीरों को नमन करते हुए आप सभी को स्वतन्त्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें !