Tuesday, March 22, 2022

चक्र व्यूह से बाहर हुआ जो

आज का दिन सृष्टि के इस क्रम में पहली बार आया हो या अनेक बार दोहराया गया हो, हमारे लिए नया  है; क्योंकि सृष्टि की गति रैखिक नहीं है, यह एक चक्र है; सुबह, दोपहर, शाम व रात के बाद फिर सुबह आती है और समय का चक्र चलता रहता है। इस चक्र में हर प्राणी घूम रहा है, जो इससे बाहर हो गये वे मुक्ति का अनुभव करते हैं। मन भी एक च्ग्क्र में बँधा गोल-गोल घूमा करता है, कभी कहीं पहुँचता नहीं। सुबह के समय मन में सात्विक भाव उठते हैं, दिन ढलते-ढलते वे खो जाते हैं। राजस और तमस अपना प्रभाव डालने लगते हैं। जब हम आदतों में बंधकर कार्य करते हैं, जानते हुए भी कि यह आदत ठीक नहीं है, तब हम तमस के प्रभाव में होते हैं। जो करणीय है वह कभी छूट ना जाए जैसे सृजन, सेवा और ध्यान, मनन, चिंतन और स्वास्थ्य के लिए व्यायाम, प्राणायाम आदि। साधना की प्रक्रिया सतत चलने वाली है। यदि स्वयं तथा अन्यों के कल्याण की भावना से कोई कृत्य किया जाता है तो वह भी सेवा है। ऐसा कृत्य परमात्मा से जुड़े होकर ही हो सकता है। हमारा मूल स्वभाव शांति, आनंद, और प्रेम है, इस बात को याद रखते हुए तथा परमात्मा का हाथ सदा सिर पर है, इसे स्मरण रखते हुए हर दिन का स्वागत ही नहीं उसे विदा भी सात्विक भाव में रहकर करना है। 


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