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Monday, May 29, 2017

जीवन जब उपहार बने

३० मई २०१७ 
जीवन की संपदा अपने आप में इतनी अनमोल है कि उस पर सब कुछ लुटाया जा सकता है, किन्तु मानव न जाने किस सुख की तलाश में जीवन को ही लुटा देने पर तुला रहता है. हम वस्तुओं को इकठ्ठा करते हैं, फिर वे एक बोझ बनकर अपनी सुरक्षा के लिए हमारे सामने उपस्थित हो जाती हैं. संबंध बनाते हैं पर दोनों तरफ की अपेक्षाएं उसे एक संघर्ष बना देती हैं. हम चाहते हैं सारी परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल बनी रहें पर जीवन का स्वभाव ऐसा नहीं है, यहाँ पल-पल संयोग बनते-बिगड़ते रहते हैं. इस आपाधापी में हम असली बात को भुला ही देते हैं, परमात्मा का साथ जो हमें सहज ही मिल सकता है, आत्मा का स्पर्श जो सदा ही हमारे साथ रहती है, हमारा मन जो स्वयं में डूबना चाहता है, कभी प्रकृति के सौन्दर्य में, कभी संगीत में, कभी बस चुपचाप प्रियजनों  के साथ  चांदनी रात में बैठकर, लेकिन आज के मानव के पास अपने निकट आने के लिए समय ही नहीं है. जीवन तब एक दुविधा बन जाता है. 

Friday, June 29, 2012

अनंत की ओर


मई २००३ 
ज्ञान वही है जो वक्त पर काम आये, नहीं तो मस्तिष्क पर बोझ डालने जैसा ही है. जो वस्तु, व्यक्ति व परिस्थिति को को नहीं स्वीकारते, वही दुखी होते हैं, जो मुसीबत आने पर मुस्कान से किनारा कर लेते हैं, वे कहाँ तत्व को जान पाए. जब ज्ञान के अवसर का उपयोग आये तब हम अक्सर चूक जाते हैं. अध्यात्म की दुनिया अनंत है, उसमें कोई सीमा हो ही नहीं सकती. वह मुक्त करती है. आत्मा की शक्ति का परिचय हमें इसी दुनिया में मिलता है. वह दुनिया इसी दुनिया में है, बल्कि यह दुनिया, यह छोटा सा जगत उस अनंत दुनिया में समाया है. हमें तो बंधन पसंद है सो उस अनंत दुनिया से हम वास्ता नहीं रखते. पर जब बंधन बोझ लगने लगे, कोई पूर्व पुण्य उदय हो जाये, कृपा हो जाये तो उस अनंत दुनिया के द्वार हमारे लिये खुलने लगते हैं.