Tuesday, November 6, 2012

वही सम्भाले रहता पल-पल


अक्तूबर २००३ 
हमारे जीवन में जब कोई विपत्ति आती है, उसको सहने की शक्ति केवल भक्ति में ही है. हम अकेले नहीं हैं, अस्तित्व हमारे साथ है, वही हमारे जीवन का रथ हांकता है और हमारा सच्चा सुह्रद है, हितैषी है. विपत्ति हमें हिलाना चाहती है पर कोई हमें सम्भाल लेता है, इसका अनुभव हमें कई बार हुआ है, हर बार उसी ने हमें बचाया है जो हमारी आत्मा है. उसे यदि हम भूल भी जाएँ तो वह हमें अपनी याद दिलाता है, वही विपत्ति से बचाकर पुनः शरण में ले आता है. हर क्षण वह हमारे अपराधों को क्षमा करता है, वह क्षमा करता है क्योंकि वह प्रेम करता है, प्रेम की शक्ति अपार है, वह अपने उदाहरण से हमें भी सिखाता है कि हम भी औरों को क्षमा करें, निर्णय सुनाने का अधिकार हमें नहीं है, यदि ईश्वर हमें निर्णय सुनाने लगे तो हम इस धरा पर रहने के काबिल नहीं हैं, पर वह हमें हजारों बार अवसर देता है धीरे-धीरे जैसे कोई बच्चे को हाथ पकड़ कर चलना सिखाता है वैसे ही वह कान्हा हमें जीना सिखाता है. वह अपने प्रतिनिधि सद्गुरु को हमारे जीवन में भेजता है. उनके सान्निध्य में हम परम के मार्ग पर चलते हैं. वह हमें कितने विभिन्न उपायों से अपने वास्तविक स्वरूप का दर्शन कराते हैं. हमारे मन पर अज्ञान की जो मैल जम गयी है, उसे धोना सिखाते हैं. सच्चे हृदय से जब हम उनकी शरण में जाते हैं तो वह कृपा करके आनंद, शांति, प्रेम तथा ज्ञान का उपहार देते हैं, उनकी कृपा के हम पात्र बनें तो वह लुटाने को तैयार हैं. सद्गुरु का जीवन हमारे सम्मुख ईश्वर का रहस्य खोलकर रख देता है.

6 comments:

  1. जो है वह विश्वास से है, वरना क्रमिक अंत तो हर हाल में है

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    1. रश्मि जी, यदि विश्वास भी ऐसा हो जो अनुभव से उपजा है..और तब अंत कभी नहीं आता..

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  2. सद्गुरु का जीवन हमारे सम्मुख ईश्वर का रहस्य खोलकर रख देता है.,,,,

    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,,,,,

    RECENT POST:..........सागर

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    1. धीरेन्द्र जी, आभार !

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  3. डायरी के पन्नो से ये सुन्दर शब्द :-

    "हर क्षण वह हमारे अपराधों को क्षमा करता है, वह क्षमा करता है क्योंकि वह प्रेम करता है, प्रेम की शक्ति अपार है, वह अपने उदाहरण से हमें भी सिखाता है कि हम भी औरों को क्षमा करें, निर्णय सुनाने का अधिकार हमें नहीं है, यदि ईश्वर हमें निर्णय सुनाने लगे तो हम इस धरा पर रहने के काबिल नहीं हैं, पर वह हमें हजारों बार अवसर देता है धीरे-धीरे जैसे कोई बच्चे को हाथ पकड़ कर चलना सिखाता है ।"

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    1. इमरान, खुशी हुई कि आपको ये शब्द अच्छे लगे..आभार!

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