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Friday, November 2, 2012

काली दुर्गे नमो नमः



अक्तूबर २००३ 
माँ काली का रूप भयानक है, उसके पीछे भी एक रहस्य है. यदि उसके प्रति समपर्ण हो तो भय नहीं रहता, क्योंकि एक ही चेतना प्रेम या भय के रूप में प्रकट होती है, जहां प्रेम है वहाँ भय नष्ट हो जाता है. जो काली से प्रेम करेगा वह निर्भय हो ही जायेगा. उसके हाथ में कटा सिर है, अर्थात अहं का नाश करती है. कटे हुए हाथों का अर्थ है कर्मों का कट जाना. काली कृपा का प्रतीक है, वह मौन है, ज्ञान की अनंत शक्ति है, वह शिव के ऊपर स्थित होकर ही शांत होती है. शिव ही शांत मौन चेतना है, उसमें जब ज्ञान शक्ति का उदय होता है तभी वह  मंगलकारिणी होती है.