Tuesday, March 31, 2015

पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ

सितम्बर २००८ 
परमात्मा से हमारे मिलन में सबसे बड़ा बाधक हमारा ज्ञान है. परमात्मा प्रकृति के सौन्दर्य में झलकता है, पवित्रता में झलकता है. यह अस्तित्व जो इतना निकट है, इतना प्यारा है, पर हम अपने तथा कथित ज्ञान के कारण उसे सराहते नहीं, उस पर न्योछावर नहीं होते. हम जीवित हैं यही अहसास हमें परमात्मा के साथ एक कर सकता है. हम चेतन हैं, वह भी चेतन है. हम प्रेम चाहते हैं, प्रेम करते हैं, वह भी प्रेम स्वरूप है. हम आनंद चाहते हैं वह आनंद ही है. यह ज्ञान ही है जो सहज आनंद को भी ढक लेता है. अहंकारी बना देता है. सौभाग्यशाली हैं वे जो अज्ञानी होने का सुख अनुभव कर लेते हैं.

3 comments:

  1. बिलकुल सच कहा है..प्रभु की राह में हमारा तथाकथित ज्ञान ही सबसे बड़ी बाधा है..

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  2. Nice Article sir, Keep Going on... I am really impressed by read this. Thanks for sharing with us. Government Jobs.

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  3. कैलाश जी व वाधिया जी स्वागत व आभार !

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