जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब एकाएक सब कुछ बदल जाता है, आज यह घटना किसी एक के साथ नहीं सबके साथ घटी है, जी हाँ, सारे विश्व में हरेक के साथ. विकसित हो या अविकसित कोई देश इससे बचा नहीं है, अमीर या गरीब, लोकतंत्र या राजतन्त्र, छोटा या बड़ा, डॉक्टर या मरीज, जवान या वृद्ध कोई भी कोरोना वायरस के भय से बचा नहीं है. आज हम सबको एक परीक्षा का सामना करना है, मानव ने जीवन को, स्वास्थ्य को, अपने होने को अपना अधिकार मान लिया था, आज उसकी कीमत चुकानी है. हमें अगले कुछ सप्ताहों तक घरों से बाहर नहीं निकलना है, अपनी आवश्यकताओं को कम से कम करना है, ताकि आर्थिक मंदी का असर न हो, साथ ही हम उन लोगों की कुछ मदद कर सकें जो प्रतिदिन कमाते हैं और जिनका रोजगार इस बंदी के कारण खत्म हो गया है. हमें मानसिक रूप से सबल रहना है चाहे कितना ही लंबा समय हमें इस तरह गुजारना पड़े. योग, ध्यान, संगीत, पुस्तकों का अध्ययन और सकारात्मक चिंतन हमें स्वस्थ रहने में बहुत मदद कर सकते हैं. चीन में काफी हद तक कोरोना पर काबू पा लिया गया है, यदि हम भी सरकार व डॉक्टरों की हिदायतों का पालन करेंगे तो शीघ्र ही स्थिति में सुधार होगा.
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Saturday, March 21, 2020
Friday, February 23, 2018
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
२४ फरवरी २०१८
भगवद् गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं यदि कोई मात्र स्वयं को किसी कर्म का
कर्ता मानता है तो यह उसका अज्ञान है. किसी भी कार्य को सम्पन्न होने के लिए
अनुकूल संयोग जब तक उपस्थित न हों तब तक वह कार्य नहीं हो सकता. एक बीज को उगने के
लिए मिट्टी, हवा, पानी और हवा चाहिए, पर माली यदि कहे यह पौधा उसने उगाया है तो इस
बात में कितनी सच्चाई होगी. इसीलिए कर्म के बाद फल हमारे हाथ में हो नहीं सकता. फल
प्राप्ति भी किसी न किसी कर्म के रूप में सामने आएगी, जिसके लिए पुनः अनुकूल संयोग
होने चाहिए. कर्तापन का बोझ यदि किसी के सिर पर न रहे तो वह कितना हल्का महसूस
करेगा. कर्ता होते ही हम भोक्ता भी हो जाते हैं. यदि कोई विद्यार्थी वर्ष भर मेहनत
करता है किन्तु किसी कारण वश परीक्षा में फेल हो जाता है, तो उसे स्वयं को दोषी
मानने की जरा भी आवश्यकता नहीं है. ‘नेकी कर कुएं में डाल’ कहावत के पीछे भी यही
भाव है, कि अच्छा कार्य भी उचित संयोग बैठने से ही सम्भव हुआ. किन्तु जानबूझ कर गलत
कार्य करके हम इस उपाय द्वारा स्वयं को कर्ताभाव से मुक्त नहीं कर सकते, उस समय
हमें फल के लिए तैयार रहना होगा.
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