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Monday, April 26, 2021

मिलकर जब सब करें सामना

 कोरोना के खिलाफ जो जंग भारत ने लगभग जीत ही ली थी, सकुचाते हुए जिसकी विजय का जश्न भी मनाया था. उसे फिर हार न जाएं ऐसा डर आज हम सभी के मनों में समाया है। ऐसा लग रहा है जैसे हम सोते ही रहे और दुश्मन घर तक आ गया, और देखते ही देखते हर शहर, हर गली मोहल्ले में छा गया. आज सब ओर भय का वातावरण है लेकिन हमें याद रखना होगा, जो भयभीत है वह मन है। जो  उस भय को देखता है, वह हम हैं। जब हम कहते हैं मुझे भय लग रहा है, हम मन के साथ एकात्म हो जाते हैं. मन माया है. हम माया से बंध जाते हैं. जो जानता है, वह हम हैं जानने में एक दूरी है। इस दूरी का अनुभव करते हुए हम पुन: जीतेंगे इस दुगने विश्वास से लड़ना है. लॉक डाउन का पालन बड़ी सख्ती से करना है जीवनचर्या में प्राणायाम को शामिल कर प्राणों में नैसर्गिक वायु भरनी है. न कि अस्पतालों में आक्सीजन के लिए लंबी कतारें खड़ी करनी हैं.  हम भूल गए कि वायरस अभी जिंदा है, हर मौत जो किसी की कहीं हुई, उसके लिए हर भारतीय शर्मिंदा है। किन्तु हमें इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने देना है। हर नागरिक हर नियम का कड़ाई से पालन करे, इस मुश्किल घड़ी में हमें मिलकर सुरक्षित निकलना है। अगली लहर आए उससे पहले ही मुस्तैदी से तैयार रहना है। स्वच्छता का दामन थाम पौष्टिकता का ध्यान रखना है। वैक्सीन लगवा कर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना है। सब उपाय करके अब घर-घर से वायरस को विदा करना  है। 



Sunday, January 24, 2021

जहाँ विजय है लोकतंत्र की

कल देश का बहत्तरवाँ गणतंत्र दिवस है, कोरोना के कारण इस बार परेड में कुछ बदलाव हुए हैं, मुख्य अतिथि भी नहीं आ रहे हैं। राजधानी में किसानों के आंदोलन के कारण भी कुछ अनिश्चितता का वातावरण है। किन्तु कुछ भी हो, देश वासियों के दिलों में गणतंत्र दिवस मनाने का जोश उतना ही है। पिछले एक वर्ष में बहुत कुछ ऐसा हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था, लंबा लॉक डाउन, मजदूरों की घर वापसी, कोरोना के कारण अस्पतालों में मरीजों की बेतहाशा भर्ती, आर्थिक मंदी, स्कूलों का बंद होना और भी कितनी कठिनाइयों को झेलते हुए यह पिछला वर्ष पूरी दुनिया के लिए एक चिंता की वजह छोड़ गया है। इन सबके बावजूद मानव आगे की ओर देख रहा है,  वैक्सीन का निर्माण हो चुका है, कोरोना पर काफी हद तक नियंत्रण हो चुका है। भारत विश्व के कई देशों को इसकी वैक्सीन भेजने में सक्षम है, यह बात भी हमारे लिए कितने गर्व की है। एक बार फिर राजपथ पर सुंदर झाँकियाँ, बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा सैन्य बलों का प्रदर्शन एक बार फिर यह सिद्ध कर देगा कि आपदा चाहे कितनी भी भीषण क्यों न हो मानवता अपना मार्ग ढूंढ ही लेती है। अंधेरा कितना भी घना क्यों न हो उजाले को रोक नहीं सकता। बांग्ला देश की आजादी की स्वर्णजयंती के अवसर पर वहाँ का एक सैन्य बैंड भी गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेगा।  

 

Monday, September 28, 2020

प्रकृति का सम्मान करे जो

 दुनिया में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। मौत की खबर अब किसी को पहले की भांति नहीं कंपाती। मृत्यु एक संख्या बनकर रह गई है। मृत व्यक्तियों का अंतिम संस्कार भी कई बार अस्पताल द्वारा ही अजनबियों के हाथों कर दिया जाता है। सफेद बैगों में बंद वे तन अपनों के अंतिम स्पर्श व दर्शन से भी वंचित हो जाते हैं।कुछ दिन पहले उनके भीतर भी धड़कते दिल थे, उन्हें भी यकीन था कि कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। वे भी शक्ति के एक पुंज थे और उसी अनंत स्रोत से आए थे।  मानव को अब जागकर देखना होगा कि  जीवित रहना कितना सरल है यदि वह हवा को मैला  न करे। मिट्टी से जुड़ा रहे. कीट नाशक दवाओं का अंधाधुंध प्रयोग न करे। दूध में रसायन न मिलाए। सब्जियों और फलों को इंजेक्शन न लगाए।  समुद्री जीवन हो या बर्फीले स्थानों के प्राणी और वनस्पति, कहीं भी मानव की नीतियों का गलत असर न हो। जीवन का स्रोत तो एक ही है, यदि प्रकृति के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार  होगा तो वह देख पाएगा जीवन कितना सुंदर है। झरनों का संगीत, वर्षा  की रिमझिम, हवाओं का स्पर्श, नदियों के तट की सुषमा सभी को अनुभव करके दैवी गुणों का विकास हो तो प्रकृति का शांत रूप ही प्रकट होगा। 


Wednesday, July 22, 2020

सार-सार को गहि रहे

कोरोना का कहर जारी है. पूरा विश्व इस कठिन दौर से गुजर रहा है. साथ ही कहीं बाढ़, कहीं भूकम्प तो कहीं बादल फटने या बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी मानव की परीक्षा ले रही हैं. इसी आपदकाल में कहीं युद्ध के अभ्यास भी चल रहे हैं, आतंकवाद भी जारी है और राजनीतिज्ञ भी अपनी चालों से बाज नहीं आ रहे हैं. यानि ऊपर-ऊपर से लगता है, दुनिया जैसी चल रही है उसमें किसी का भला होता नहीं दीख रहा. किन्तु सिक्के का दूसरा पहलू भी है, लोग एक दूसरे के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो रहे हैं, परिवार जो वर्षों से अलग अलग थे एक छत के नीचे रह रहे हैं. घर से काम करने से ट्रैफिक की समस्या घट गयी है, सड़क दुर्घटनाएं बन्द हो गयी हैं. प्रदूषण बहुत कम हो गया है.  वातावरण शुद्ध हो रहा है. बच्चों पर पढ़ाई का दबाव नहीं है, वे बुरी संगत से बच रहे हैं. बाहर खाना खाने  की प्रथा बढ़ती जा रही थी, उसकी बजाय लोग घर पर पारंपरिक भोजन बना रहे हैं. योग साधना का समय मिल रहा है. जीवन के प्रति सजगता बढ़ रही है. प्रकृति को शायद विश्राम चाहिए था इसलिए वह फल-फूल रही है. नदियां साफ हो गयी हैं. हवा शुद्ध हो गयी है. क्यों न हम सकारात्मकता का दामन पकड़ें और इस समय को गुजर जाने दें. 

Sunday, July 19, 2020

कोरोना से जो बचना चाहे


वर्तमान समय, जीवन जब एक तरफ कोरोना के कारण आपदा में घिरा है तो दूसरी ओर मानवीय शक्ति और क्षमता को परखने का स्वर्ण काल भी है. जीवन को किस तरह बचाएं इसके लिए दुनिया भर में वैज्ञानिक शोध कार्य कर रहे हैं. कम साधनों में किस तरह जीवन चलाएं इसके प्रति भी लोग सजग हो रहे हैं. भौतिकता को त्याग सादा जीवन उच्च विचार की परिपाटी पर चलने का समय भी यही है. कितने ही व्यवसाय बन्द हो चुके हैं, साथ ही कार्य के नए - नए क्षेत्र भी खुल रहे हैं. निराश होकर उदास होने का समय नहीं है, यह सजग और सतर्क रहकर जीवन को इस प्रकार जीने का समय है कि कम से कम ऊर्जा की खपत हो और अधिक से अधिक साधन बचाये जा सकें. वैज्ञानिकों की मानें तो कोरोना काल अभी लम्बा खिंचने वाला है. देश को अधिक दवाइयों, स्वास्थ्यकर्मियों व अस्पतालों की जरूरत होगी, साथ ही देशवासियों को अधिक मनोबल और मानसिक शक्ति की भी जरूरत होगी. नियमित जीवनशैली अपना कर, जिसमें योग, ध्यान हो, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आहार हों तथा समाज व देश के प्रति अपना कर्त्तव्य निभाने की ललक हो तो हम इस विपदा काल में भार नहीं बनेंगे बल्कि भार वाहक बन सकते हैं. 

Wednesday, July 1, 2020

जीवन की कीमत जो जाने

अभी तक दूर था कोरोना, कल ही पता चला हमारी कालोनी में भी चेन्नई से लौटे एक व्यक्ति को संक्रमण हुआ, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उसे ले गए, परिवार को क्वारन्टाइन कर दिया गया है. पूरी बिल्डिंग को ही बंद कर दिया है. यह इमारत हमारे घर से आधा किमी दूर है. सुबह-शाम अभी तक बिना किसी भय के टहलने जाते थे, शायद अब संभव न हो. आज सुबह पहली बार बाहर जाते समय इसका अहसास हुआ. पूरे विश्व में लाखों लोग इसी और इससे कहीं ज्यादा आशंका में जी रहे हैं. ऐसे में आवश्यक है कि मन यदि एक क्षण के लिए भी विक्षेपित हो तो तत्क्षण उसे सचेत कर दिया जाये. जीवन क्षण-क्षण में मिलता है, यदि एक पल गया तो उसका अगला पल भी वैसा  ही फल लाने वाला है. सचेत रहना होगा और नजर खुले विस्तीर्ण आकाश पर रखनी होगी, जिसके नीचे न जाने कितनी महामारियाँ  जन्मी, पनपीं और नष्ट हो गयीं. कोरोना भी अपना असर कुछ काल तक और डालेगा, कुछ महीने, एक साल, दो साल या उससे भी ज्यादा, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. जीवन कितना बहुमूल्य है यह सबक सीखने का सुनहरा अवसर है आज, धन की सही कीमत क्या है और रिश्तों की अहमियत क्या है, यह सीखने का वक्त भी है आज. परमात्मा ही संचालक है मानव की अल्पबुद्धि सदा काम नहीं आती, यह पाठ भी तो हमें सीखना है. कोरोना ने सारे विश्व की पाठशाला खोल दी है, सभी देशों के वासी उसके विद्यार्थी हैं.  

Sunday, May 3, 2020

विपदा में जो हाथ बढ़ेगा

विश्व के अन्य कई देशों की तरह भारत में भी लॉक डाउन अभी  खत्म नहीं हुआ है, कोरोना ने पूरी दुनिया में मजबूती से अपने पैर पसार लिए हैं और वह जल्दी विदा लेने के मूड में नजर आता नहीं दिख रहा है. वैज्ञानिक अभी तक कोई वैक्सीन नहीं खोज पाए हैं, हमें ही इससे बचाव करते हुए जीना सीखना होगा. अनावश्यक घर से बाहर न निकलना पहला नियम है. भीड़भाड़ से बचाव इससे स्वतः ही हो जायेगा. सरकार ने जिन्हें छूट दी है वे दुकानें तथा प्रतिष्ठान खुल रहे हैं किन्तु उनमें जाने से पहले हरेक को सजगता बरतनी है. मास्क का उपयोग तथा सेनिटाइजर का बार-बार प्रयोग स्वभाव में ही शामिल कर  लेना होगा. जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक है, उन्हें बेशर्त दूसरों की सहायता के लिए आगे आना होगा. इतिहास में ऐसे अवसर कभी-कभी ही आते हैं जब पूरी मानवता का अस्तित्त्व ही खतरे में पड़ जाता है, तब दुनिया समर्थ और सक्षम का आश्रय लेती है. जिस तरह से भी हो सके हमें मदद के लिए हाथ बढ़ाना है. हर धर्म में दान धर्म का बहुत महत्व बताया गया है. सरकार ने अपने भंडार असमर्थों के लिए खोल दिए हैं, हमें भी उसकी सहायता के लिए तत्पर रहना होगा.

Saturday, April 11, 2020

स्वयं को जो जन सबल बनाये


धरती की आयु अरबों वर्ष की है, मानव को धरती पर आये भी लाखों वर्ष बीत गये हैं. हमारे पास मानव सभ्यता का जो ज्ञात इतिहास है उसमें अनेक महामारियों का जिक्र आता है, अर्थात यह कोई नयी बात नहीं है. आज विज्ञान का युग है इसलिए इस महामारी का असर कम हुआ है, जी, हाँ, पिछली महामारी में जो लगभग सौ वर्ष पूर्व आयी थी, उसमें करोडों जानें गयी थीं. आज हमारे पास साधन हैं और बचाव के बेहतर उपाय हैं. जो लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, वे ठीक भी हो रहे हैं और दुर्भाग्यवश जो बच नहीं पाए उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम थी. अब सबसे पहली आवश्यकता है हम जो अभी तक बचे हुए हैं, स्वयं को मजबूत बनाएं. मानसिक रूप से सबल व्यक्ति की रोग से लड़ने की ताकत ज्यादा होती है. एक न एक दिन तो हमें अपने घरों से बाहर जाना ही है, और जब तक इस रोग की कोई वैक्सीन नहीं आती, इससे बचने का उपाय एक ही है कि हम सामाजिक दूरी बनाये रखें. कोरोना का वायरस हर मौसम में जिन्दा रह सकता है, सो यह कहीं चला जायेगा इसकी उम्मीद करना व्यर्थ है. हमें स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए आने वाले छह-आठ महीनों तक नाक-मुख को ढक कर ही बाहर निकलना होगा. इसी तरह बार-बार हाथ धोने की आदत तो तब तक स्वभाव में ही बदल चुकी होगी. अति आवश्यक कार्य होने पर ही हमें घर से बाहर जाना होगा. धीरे-धीरे ताला-बंदी में ढील दी जाएगी लेकिन नागरिकों को किसी भी प्रकार के संक्रमण से सतर्क रहने की अपनी आदत को स्वयं ही विकसित करना होगा. 

Friday, April 10, 2020

बदल रहा चलन दुनिया का

अब हम अपने जीवन के इतिहास को बताने के लिए समय को दो भागों में बाँट कर कहेंगे, पहला कोरोना वायरस के आने के पहले का काल और दूसरा उसके आगमन के बाद का. उदाहरण के लिए हम कहेंगे, जब वायरस नहीं पनपा था तब हम विदेश घूमने गए थे। उन दिनों हम सब एक साथ घूमने जाते थे, घरों में सामूहिक भोज का आयोजन करते थे. वर्तमान में हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते. लॉक डाउन खुलने के बाद भी हमारा जीवन पहले का सा नहीं रह जायेगा. अगले कई वर्षों तक हमें पूरी सावधानी रखनी होगी, हममें से जो भी बुजुर्ग हैं या किसी न किसी रोग से ग्रसित हैं, उन्हें तो विशेष रूप से घर पर रहने के लिए ही कहा जायेगा. बच्चे स्कूल जाने की अपेक्षा ऑन लाइन पढ़ना ज्यादा पसन्द करेंगे. पहले की तरह हम सामान्य रूप से मॉल, बाजार और प्रदर्शनियों में जाकर खरीदारी नहीं कर सकेंगे. बाहर निकलते समय मास्क पहनना सामान्य बात हो जाएगी. फ़िल्में भी सिनेमाघरों की बजाय ऑन लाइन ही रिलीज होंगी. घरों व सड़कों की सफाई  पर ज्यादा ध्यान दिया जायेगा. मन्दिरों में अब पहले की तरह भीड़ नहीं होगी, लोग नेट पर ही दर्शन करेंगे और घरों में पूजा करेंगे. योग और ध्यान जीवन का एक अभिन्न अंग बन जायेगा. विदेश यात्रा का मोह कम हो जायेगा और छात्रों में अपने ही देश में रहकर पढ़ने को बेहतर कहेंगे. पारिवारिक मूल्य फिर से स्थापित होंगे और अनावश्यक घूमना-खरीदारी बंद हो जायेंगे. लोगों में दूसरों की मदद करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और जीवन सरल और सादा होगा. 

Sunday, March 29, 2020

बाहर से जो भी उबरेगा


यह विचित्र युग है, आज इतिहास बन रहा है, आज से सौ वर्षों बाद इतिहास की किसी किताब में कोई पढ़ रहा होगा कि कोरोना-महामारी ने कैसे दुनिया को हैरान-परेशान कर दिया था. हवाई जहाज, रेल,बसें, कारें सभी थम गए थे और हजारों लोगों ने अपने प्राण गंवाए थे. इस महामारी का आर्थिक विश्लेषण भी किया जायेगा और राजनीतिक भी. वर्तमान में जो भी घट रहा है हम उसके साक्षी हैं, जो कोरोना के शिकार हुए हैं, जिनके परिवार का कोई सदस्य नहीं रहा, उनके दुःख का अंदाजा हम नहीं लगा सकते. जिनका रोजगार छिन गया, जिनके घर छूट गये, उनका दुःख तो समय के साथ कम हो जायेगा, किंतु उसका असर किसी न किसी रूप में बना ही रहेगा. स्थिति को सुधारने के लिए हममें से हरेक अपने तौर पर कुछ न कुछ मदद कर सकता है, और कुछ न भी कर सके घर में बने रहकर बीमारी से बच सकता है और अंततः औरों को बचा सकता है. जब ऊर्जा को बाहर जाने का कोई अवसर नहीं मिलता तो वह गतिशील होने के कारण भीतर ही तो जाएगी, आज हमें अवसर मिला है कुछ दिन अपने साथ रहने का, अपने भीतर जाने का. जीवन की इस उहापोह भरी स्थिति में जब बाहर कोई आधार नहीं मिलता हो तब भीतर के केंद्र को पाकर उसे आधार बनाकर हम जीवन के मर्म को समझ सकते हैं. 

Thursday, March 26, 2020

इक्कीस दिन की करें साधना


कोरोना का असर दुनिया भर में करोड़ों लोगों पर पड़ रहा है, लोग घरों में बन्द रहने को मजबूर हैं, वे बच्चों को व्यस्त रखने के लिए नई-नई तरकीबें सोच रहे हैं, आपस में खेल रहे हैं, फ़िल्में देख रहे हैं, तस्वीरें बना रहे हैं, तस्वीरें खींच रहे हैं, अच्छा सुस्वादु भोजन बना रहे हैं और सोच रहे हैं जल्दी ही ये इक्कीस दिन बीत जाएँ और सब कुछ सामान्य हो जाये. अख़बार भी बन्द है. कामवाली, माली, धोबी अब कोई भी तो नहीं आ रहा, सो कुछ समय तो घर की सफाई, बर्तनों की सफाई, पौधों की देखभाल और कपड़े धोने में निकल जाता है, कुछ समय आजकल और रिपब्लिक टीवी आदि पर कोरोना के ताजे समाचार देखने में. नवरात्रों का समय है तो कुछ समय सुबह-शाम पूजा पाठ में. इसके बाद भी समय बचता है, तो व्हाट्सएप पर मैसेज भेजने और फेसबुक पर लाइक करने में निकल जाता है. कोरोना ने कितनों के भीतर छुपी प्रतिभाओं को उभरने का मौका दिया है, कोरोना गीत, गजल, कविताएं और कहानियाँ यहां तक कि फिल्मों की स्क्रिप्ट तक लिखी जा रही है. सरकार भी सबके हित में काम कर रही है. यदि सभी देशवासी इस लॉक डाउन का पूरी तरह से पालन करते हैं तो दुनिया के सामने एक मिसाल कायम होगी और डॉक्टर्स बेशकीमती जानों को बचा पाएंगे. 

Tuesday, March 24, 2020

घर में रहना जो सीखेगा

कोरोना वायरस जीवित नहीं है, इसलिए इसे मारा भी नहीं जा सकता. उसकी यही रणनीति उसे अजेय बना रही है कि आज सारा विश्व उससे भयभीत है. योग वशिष्ठ में एक दैत्य की कथा आती है जो मारा नहीं जा सकता था क्योंकि उसमें अपने होने का अहसास ही नहीं था, वह एक रोबोट की तरह अपने मालिक की आज्ञा का पालन मात्र कर रहा था. देवताओं को जब उसे मारने में असफलता ही मिल रही थी, तो उन्हें सुझाया गया, उस दैत्य में अहंकार पैदा करो, तभी वह मरेगा. कोविड -19 को जिन्दा करना हो तो उसे मानव देह में ही किया जा सकता है, लेकिन जैसे ही यह एक मानव के भीतर प्रवेश करता है, उसकी कोशिकाओं को खुद के लाखों और संस्करण बनाने के लिए अपहरण कर लेता है। एक और बात जो इसे भयावह बनाती है, रोगी को उसके प्रवेश का पता ही नहीं चलता क्योंकि कोई भी लक्षण नहीं मिलते, पर उसके पूर्व ही वायरस कई अन्य व्यक्तियों को अपना शिकार बना चुका होता है. यह वायरस पहले दो स्थानों को संक्रमित करता है, नाक और गला, फिर यह फेफड़ों में प्रवेश करता है, जहां यह कम आसानी से फैलता है लेकिन बहुत अधिक घातक होता है। जब यह नासिका या गले में रहता है, आसानी से खांसी या छींक द्वारा वातावरण में फ़ैल जाता है, लेकिन कुछ रोगियों में, यह फेफड़े के भीतर खुद को गहरा ले जा सकता है, जहां रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। इससे बचने का एकमात्र उपाय है कि हम संक्रमित व्यक्तियों के सम्पर्क में न आएं और न ही किसी को संक्रमित करें. इसके लिए घर में रहना ही सबसे कारगर उपाय है.


Sunday, March 22, 2020

नियमित योग करेगा जो


कोरोना वायरस श्वास तन्त्र पर हमला करता है. फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए श्वास विधि को सीखना अति आवश्यक है. सभी जानते हैं कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी प्राणायाम और योग आसन करने चाहिए. यदि किसी को सामान्य सर्दी-जुकाम बार-बार हो जाता है तो उसे भी अपने श्वसन तन्त्र को दृढ करने के लिए कपालभाति, भस्त्रिका और नाड़ी शोधन प्राणायाम नियमित करना चाहिए. भारत में पिछले कुछ वर्षों से योग का प्रसार जन-जन में हो गया है, बहुत बड़ी आबादी सुबह की शुरुआत योग की किसी न किसी साधना से करती है, सम्भव है यही कारण है कि भारत में अभी तक कोरोना के बहुत अधिक मामले नहीं हुए हैं, अभी भी इस पर नियंत्रण किया जा सकता है. यदि हम इस बात की गम्भीरता को समझें, स्वयं को संक्रमित होने से बचायें, नियमित योग साधना के द्वारा अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रखें. नियमित जीवन शैली, शुद्ध सात्विक आहार तथा ध्यान का अभ्यास करके अपने मनोबल को बनाये रखें तो हम न केवल स्वयं सुरक्षित रह सकते हैं बल्कि विश्व के सामने आदर्श समाज का एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर सकते हैं.

Saturday, March 21, 2020

डट कर करें सामना सब मिल


जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब एकाएक सब कुछ बदल जाता है, आज यह घटना किसी एक के साथ नहीं सबके साथ घटी है, जी हाँ, सारे विश्व में हरेक के साथ. विकसित हो या अविकसित कोई देश इससे बचा नहीं है, अमीर या गरीब, लोकतंत्र या राजतन्त्र, छोटा या बड़ा, डॉक्टर या मरीज, जवान या वृद्ध कोई भी कोरोना वायरस के भय से बचा नहीं है. आज हम सबको एक परीक्षा का सामना करना है, मानव ने जीवन को, स्वास्थ्य को, अपने होने को अपना अधिकार मान लिया था, आज उसकी कीमत चुकानी है. हमें अगले कुछ सप्ताहों तक घरों से बाहर नहीं निकलना है, अपनी आवश्यकताओं को कम से कम करना है, ताकि आर्थिक मंदी का असर न हो, साथ ही हम उन लोगों की कुछ मदद कर सकें जो प्रतिदिन कमाते हैं और जिनका रोजगार इस बंदी के कारण खत्म हो गया है. हमें मानसिक रूप से सबल रहना है चाहे कितना ही लंबा समय हमें इस तरह गुजारना पड़े. योग, ध्यान, संगीत, पुस्तकों का अध्ययन और सकारात्मक चिंतन हमें स्वस्थ रहने में बहुत मदद कर सकते हैं. चीन में काफी हद तक कोरोना पर काबू पा लिया गया है, यदि हम भी सरकार व डॉक्टरों की हिदायतों का पालन करेंगे तो शीघ्र ही स्थिति में सुधार होगा.

Thursday, March 19, 2020

जब उत्तरदायित्व सभी निभाएं


कोरोना का खतरा जब तक खत्म नहीं हो जाता, हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी है. सरकार और डॉक्टर जो हिदायतें भी दे रहे हैं, वे हम सभी की सुरक्षा के लिए हैं. हमें इस माह के अंत तक अपने-अपने घरों में ही रहना है. सर्दी-जुकाम होने पर हेल्पलाइन नम्बर पर सुचना देनी है. यदि किसी विदेश यात्रा से लौटे हैं तो और भी सावधान रहना होगा. साफ-सफाई का ध्यान रखना है और जीवाणु नाशक साबुन का प्रयोग करना है. कोरोना के रोगी ठीक हो रहे हैं, शरीर के भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता यदि मजबूत है तो धैर्य के साथ इसका मुकाबला किया जा सकता है. ईश्वर न करे कि कोई इसकी चपेट में आये, यदि हम सुरक्षित रहेंगे तो अन्यों को भी सुरक्षित रखने में सहायता करेंगे. दुनिया भर में वैज्ञानिक इसका इलाज खोज रहे हैं, जल्दी ही इसका टीका भी खोज लिया जायेगा और मानवता को विनष्ट होने से बचा लिया जायेगा. कल शाम प्रधानमंत्री का देश के नाम संदेश सरकार की तरफ से उठाये जा रहे कदमों की ही एक अगली कड़ी थी. जनता कर्फ्यू के द्वारा तथा उन स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करके हम एक जागरूक नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं. हम्म से हरेक इस संघर्ष में एक सिपाही है, कुछ बाहर रहकर युद्धरत हैं तो कुछ को घर में रहकर अपनी भूमिका निभानी है. इस समय का सदुपयोग कैसे हो, कैसे इस संकट को पहले चुनौती मानकर फिर एक सुअवसर मानकर हम स्वयं कुछ नया कर सकते हैं, सीख सकते हैं, बच्चों को सिखा सकते हैं. जिन पुस्तकों को पढ़ने का समय नहीं मिला था, उन्हें पढ़ सकते हैं, जो स्वेटर अधूरा पड़ा है उसे पूरा कर सकते हैं. कहानियां सुना सकते हैं, पहेलियाँ बुझा सकते हैं, यानि घर में रहने को मजबूरी न मानकर एक सुअवसर मान सकते हैं. घर की सफाई कर सकते हैं.संक्षेप में कहें तो वह सब कुछ कर सकते हैं जो समय की कमी के चलते टालते आ रहे थे. देखते-देखते यह समय भी बीत जायेगा और एक सुबह फिर सामान्य होगी, बच्चे स्कूल जायेंगे, लोग दफ्तर जायेंगे और बाजार, मॉल आदि में पहले की भांति हलचल नजर आएगी.

Wednesday, March 18, 2020

जिस पल चेतेगा मानव


अखबारों में जिस खबर को हेडलाइन बनाया जा रहा है टीवी पर वही ब्रेकिंग न्यूज है, सोशल मीडिया पर जिसे प्रमुखता दी जा रही है फोन पर चर्चा का भी वही विषय है. अपने अब तक के जीवन में ऐसा न कभी देखा न सुना, जब एक न दिखने वाले दुश्मन से डर कर लोग घरों में बन्द हो गए हों. जो सक्षम हैं वे कुछ हफ्ते घर में बन्द रहकर भी आराम से समय बिता सकते हैं पर जिनका जीवन दैनिक रोजगार पर आधारित हो, वे काम न मिलने से कितने प्रभावित हो रहे होंगे. क्या आज यह सोचने की जरूरत नहीं है कि ऐसा क्यों हुआ, क्या यह मानव की नियति है अथवा उसके किसी कर्म का फल. महामारियां पहले भी फैलती रही हैं जब इलाज की इतनी सुविधाएँ नहीं थीं पर विज्ञान के इस युग में मानव का इस तरह विवश हो जाना कई गहरे प्रश्न उठाता है. आज नहीं कल कोरोना का इलाज ढूंढ लिया जायेगा और जल्दी ही यह भय का वातावरण खत्म हो जायेगा, किन्तु उन प्रश्नों के हल तलाशना फिर भी जरूरी है. मानव ने जंगलों को काटकर बस्तियां बनायीं,शाक-सब्जी, फल, दूध होते हुए भी जीव हत्या करके अपनी क्षुधा मिटाई. फैशन के लिए और अपनी शक्ति के प्रदर्शन के लिए भी निरीह पशुओं की हत्याएँ  कीं. धरती का अनियमित दोहन किया, जल व हवा को दूषित किया, इतना करके भी स्वयं को प्रकृति का स्वामी समझकर कभी इन बातों के लिए स्वयं को दोषी नहीं माना, बल्कि विकास के नाम पर इन्हें बढ़ावा ही दिया. मनोरंजन के लिए लाखों लुटाने वाले जब यह भूल जाते हों कि उनके ही पड़ोस में कोई भूखा सोने को विवश है, उच्च शिक्षा के लिए करोड़ों देकर दाखिला लेने वाले जब यह न देखते हों कि किसी असमर्थ पर कुशाग्र  विद्यार्थी की एक सीट वे ले रहे हैं. जब इतना अन्याय होता हो तो प्रकृति भी दूषित हो जाये इसमें क्या अस्वाभाविक है. काम, क्रोध, लोभ, हिंसा और अत्याचार के परमाणु जब वातावरण में बढ़ जाते हैं तो प्रकृति में हलचल होती है. आज लोग घरों में बैठे हैं तो कुछ चिंतन भी करते होंगे, सजगतापूर्वक कुछ समय स्वयं के साथ बिताकर हम अपने जीवन की नई दिशा के बारे में निर्णय ले सकते हैं. हमारा जीवन इस सुंदर ग्रह के लिए एक वरदान बने, हम इसके पोषक हों, शोषक नहीं. 

Sunday, March 15, 2020

कोरोना भयभीत करो ना



आज विश्व एक विचित्र दौर से गुजर रहा है. कोरोना के खिलाफ सभी देश आपसी भेदभाव को भुला कर एक हो गये हैं. चीन से दिसंबर में हुई इसकी शुरुआत के बाद इटली, स्पेन और ईरान में कहर बरसाता हुआ यह वायरस भारत में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है. सरकार की तरफ से दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं. भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचना है, रेल, बस या हवाई यात्रा करना सुरक्षित नहीं है. बंगलुरू में तो सभी शिक्षा संस्थान, मॉल, दफ्तर, सिनेमाघर आदि बंद कर दिए गए हैं. लोग घर से काम कर रहे हैं, बच्चे अभी से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों का लुत्फ़ उठा रहे हैं. जीवन जैसे एकाएक बदल गया है. प्रधानमंत्री ने पड़ोसी देशों को इस अदृश्य शत्रु से लड़ने में हर तरह की सहायता देने का आश्वासन दिया है. इस महामारी के कारण कुछ फायदे भी हो सकते हैं. सड़कें खाली रहेंगी तो ट्रैफिक की समस्या नहीं होगी, प्रदूषण कम होगा. बच्चों को परीक्षाओं का भय नहीं सताएगा. लोग घरों में रहेंगे तो आपसी मेलजोल बढ़ेगा. घर पर भोजन बनाने की प्रथा पुनः जागृत होगी. साफ-सफाई का ध्यान रखा जायेगा, जीवन में शुचिता का सम्मान होगा. व्यायाम के प्रति भी लोग सचेत होंगे, जड़ी-बूटी से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के नुस्खे पुनः काम में लाये जायेंगे. यदि हर कोई अपनी सुरक्षा का ध्यान रखे तो इस रोग से न केवल बचा जा सकता है, इसे फैलने से रोका जा सकता है.