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Thursday, March 19, 2020

जब उत्तरदायित्व सभी निभाएं


कोरोना का खतरा जब तक खत्म नहीं हो जाता, हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी है. सरकार और डॉक्टर जो हिदायतें भी दे रहे हैं, वे हम सभी की सुरक्षा के लिए हैं. हमें इस माह के अंत तक अपने-अपने घरों में ही रहना है. सर्दी-जुकाम होने पर हेल्पलाइन नम्बर पर सुचना देनी है. यदि किसी विदेश यात्रा से लौटे हैं तो और भी सावधान रहना होगा. साफ-सफाई का ध्यान रखना है और जीवाणु नाशक साबुन का प्रयोग करना है. कोरोना के रोगी ठीक हो रहे हैं, शरीर के भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता यदि मजबूत है तो धैर्य के साथ इसका मुकाबला किया जा सकता है. ईश्वर न करे कि कोई इसकी चपेट में आये, यदि हम सुरक्षित रहेंगे तो अन्यों को भी सुरक्षित रखने में सहायता करेंगे. दुनिया भर में वैज्ञानिक इसका इलाज खोज रहे हैं, जल्दी ही इसका टीका भी खोज लिया जायेगा और मानवता को विनष्ट होने से बचा लिया जायेगा. कल शाम प्रधानमंत्री का देश के नाम संदेश सरकार की तरफ से उठाये जा रहे कदमों की ही एक अगली कड़ी थी. जनता कर्फ्यू के द्वारा तथा उन स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करके हम एक जागरूक नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं. हम्म से हरेक इस संघर्ष में एक सिपाही है, कुछ बाहर रहकर युद्धरत हैं तो कुछ को घर में रहकर अपनी भूमिका निभानी है. इस समय का सदुपयोग कैसे हो, कैसे इस संकट को पहले चुनौती मानकर फिर एक सुअवसर मानकर हम स्वयं कुछ नया कर सकते हैं, सीख सकते हैं, बच्चों को सिखा सकते हैं. जिन पुस्तकों को पढ़ने का समय नहीं मिला था, उन्हें पढ़ सकते हैं, जो स्वेटर अधूरा पड़ा है उसे पूरा कर सकते हैं. कहानियां सुना सकते हैं, पहेलियाँ बुझा सकते हैं, यानि घर में रहने को मजबूरी न मानकर एक सुअवसर मान सकते हैं. घर की सफाई कर सकते हैं.संक्षेप में कहें तो वह सब कुछ कर सकते हैं जो समय की कमी के चलते टालते आ रहे थे. देखते-देखते यह समय भी बीत जायेगा और एक सुबह फिर सामान्य होगी, बच्चे स्कूल जायेंगे, लोग दफ्तर जायेंगे और बाजार, मॉल आदि में पहले की भांति हलचल नजर आएगी.

Sunday, March 15, 2020

कोरोना भयभीत करो ना



आज विश्व एक विचित्र दौर से गुजर रहा है. कोरोना के खिलाफ सभी देश आपसी भेदभाव को भुला कर एक हो गये हैं. चीन से दिसंबर में हुई इसकी शुरुआत के बाद इटली, स्पेन और ईरान में कहर बरसाता हुआ यह वायरस भारत में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है. सरकार की तरफ से दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं. भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचना है, रेल, बस या हवाई यात्रा करना सुरक्षित नहीं है. बंगलुरू में तो सभी शिक्षा संस्थान, मॉल, दफ्तर, सिनेमाघर आदि बंद कर दिए गए हैं. लोग घर से काम कर रहे हैं, बच्चे अभी से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों का लुत्फ़ उठा रहे हैं. जीवन जैसे एकाएक बदल गया है. प्रधानमंत्री ने पड़ोसी देशों को इस अदृश्य शत्रु से लड़ने में हर तरह की सहायता देने का आश्वासन दिया है. इस महामारी के कारण कुछ फायदे भी हो सकते हैं. सड़कें खाली रहेंगी तो ट्रैफिक की समस्या नहीं होगी, प्रदूषण कम होगा. बच्चों को परीक्षाओं का भय नहीं सताएगा. लोग घरों में रहेंगे तो आपसी मेलजोल बढ़ेगा. घर पर भोजन बनाने की प्रथा पुनः जागृत होगी. साफ-सफाई का ध्यान रखा जायेगा, जीवन में शुचिता का सम्मान होगा. व्यायाम के प्रति भी लोग सचेत होंगे, जड़ी-बूटी से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के नुस्खे पुनः काम में लाये जायेंगे. यदि हर कोई अपनी सुरक्षा का ध्यान रखे तो इस रोग से न केवल बचा जा सकता है, इसे फैलने से रोका जा सकता है.