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Sunday, March 22, 2020

नियमित योग करेगा जो


कोरोना वायरस श्वास तन्त्र पर हमला करता है. फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए श्वास विधि को सीखना अति आवश्यक है. सभी जानते हैं कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी प्राणायाम और योग आसन करने चाहिए. यदि किसी को सामान्य सर्दी-जुकाम बार-बार हो जाता है तो उसे भी अपने श्वसन तन्त्र को दृढ करने के लिए कपालभाति, भस्त्रिका और नाड़ी शोधन प्राणायाम नियमित करना चाहिए. भारत में पिछले कुछ वर्षों से योग का प्रसार जन-जन में हो गया है, बहुत बड़ी आबादी सुबह की शुरुआत योग की किसी न किसी साधना से करती है, सम्भव है यही कारण है कि भारत में अभी तक कोरोना के बहुत अधिक मामले नहीं हुए हैं, अभी भी इस पर नियंत्रण किया जा सकता है. यदि हम इस बात की गम्भीरता को समझें, स्वयं को संक्रमित होने से बचायें, नियमित योग साधना के द्वारा अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रखें. नियमित जीवन शैली, शुद्ध सात्विक आहार तथा ध्यान का अभ्यास करके अपने मनोबल को बनाये रखें तो हम न केवल स्वयं सुरक्षित रह सकते हैं बल्कि विश्व के सामने आदर्श समाज का एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर सकते हैं.

Thursday, September 14, 2017

सादा जीवन उच्च विचार यही सुखी जीवन का सार

१५ सितम्बर २०१७ 
यह काल संक्रमण का काल है. मूल्य बदल रहे हैं, संस्कृतियाँ और सभ्यताएं बदल रही हैं. देशों की सीमाएं बदल रही हैं. विश्व की उन्नति का आधार आर्थिक विकास माना जाने लगा है. व्यापारिक संबंध बढ़ रहे हैं, देश निकट आ रहे हैं. किन्तु इस सबके साथ मानव को विकास की बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ रही है. एक पीढ़ी पहले तक भी एक व्यक्ति को परिवार का सहयोग और प्रेम सहज ही मिल जाता था, जिसके कारण उसके भीतर मानवीय मूल्यों की स्थापना घर से ही आरम्भ हो जाती थी और विद्यालय उसमें विस्तार करता था. आज एकल परिवार होने के कारण बच्चे उस स्नेह और विश्वास से वंचित हैं, स्कूल भी इस कमी को पूरा नहीं कर पा रहा है. आये दिन स्कूलों में होने वाले हादसे अभिभावकों और बच्चों में एक भय की भावना भर रहे हैं. यदि मानव अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर ले, लोभ और दिखावे पर नियन्त्रण रखे. ध्यान और योग को अपना कर सुख के अविनाशी स्रोत को अपने भीतर ही खोज ले तो स्वतः ही उसकी यह अंधी दौड़ समाप्त हो जाएगी.