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Monday, May 4, 2020

पंचम वेद कहाता है जो


टीवी पर आजकल 'महाभारत' दिखाया जा रहा है. पहले भी देखा है पर रामायण की तरह यह कथा भी इतनी अनोखी है कि बार-बार देखने पर भी नई जैसी लगती है. कहते हैं जो महाभारत में नहीं है वह कहीं नहीं है अर्थात इस दुनिया में जो कुछ भी है उसका जिक्र कहीं न कहीं महाभारत में हो चुका है. एक लाख से अधिक श्लोकों के द्वारा चन्द्रवंशी राजाओं की यह कथा भारत के भव्य इतिहास को भी बताती है और विश्व का प्रथम महाकाव्य होने का गौरव भी रखती है. इसे पंचम वेद भी कहते हैं और पुराण भी कहा जाता है. वेद व्यास ने इस अद्भुत ग्रन्थ को लिखवाने का कार्य गणपति को सौंपा था. भगवद्गीता महाभारत का ही एक भाग है, जो भारत का प्रमुख धार्मिक ग्रन्थ है. वर्तमान पीढ़ी को इसे मूल रूप में पढ़ने का अवसर तो नहीं मिलेगा पर धारावाहिक के रूप में ही वे इससे परिचित हो रहे हैं और अपनी प्राचीन गौरवशाली परंपरा पर गर्व कर रहे हैं. इसके विभिन्न पात्रों पर कितने ही नाटकों व उपन्यासों की रचना हो चुकी है. भारत के कण-कण में इन प्राचीन गाथाओं की गन्ध बसी है. मानव मन की कितनी ही गाँठों को खोलती हैं इसकी कथाएं. कोरोना के कारण घरों में रहने को विवश नागरिकों के लिए अपने अतीत से परिचित होने का यह एक सुअवसर भी है. 

Monday, August 24, 2015

सोम वही है वरुण है जो


वेदों में कितनी सुंदर स्तुतियाँ और प्रार्थनाएं की गयी हैं. एक मन्त्र में ऋषि कहते हैं परमात्मा हर ओर से मानव की सुरक्षा करता है. प्राची दिशा में वही अग्नि बनकर उसका मार्ग प्रशस्त करता है, उसे आगे ही आगे बढने को प्रेरित करता है. पश्चिम में वही वरुण रूप में उसे पाप से बचाता है, अर्थात रक्षा करता है. दक्षिण दिशा में परमात्मा इंद्र बनकर बल प्रदान करता है. उत्तर में सोम बनकर शांतिप्रदाता है. ऊपर की दिशा में वह बृहस्पति बनकर ऊपर उठाता है. नीचे की दिशा में वह विष्णु बनकर हमें आधार प्रदान करता है. परमात्मा हर तरफ से आत्मा को घेरे हुए है.