Showing posts with label शिकायत. Show all posts
Showing posts with label शिकायत. Show all posts

Friday, March 27, 2015

देने में ही वह मिलता है

अगस्त २००८ 
हम जिनसे प्रेम करते हैं, प्रेम करने का दावा करते हैं, उनसे शिकायत नहीं होनी चाहिए, अन्यथा वह दावा ही झूठा है. प्रेम में न कोई शिकायत है न उलाहना, न कोई चाह. वह तो सिर्फ देने का नाम है. प्रेम असीम है सो इसकी तो कोई चिंता ही न करे कि यदि सभी को प्रेम बांटते रहे तो हमारे पास कम हो जायेगा और यदि बदले में हमें कोई प्रेम न दे तो हम खाली हो जायेंगे. जब हम प्रेम देंगे किसी को तो वह अपने आप पुनः भर जायेगा. परमात्मा ही तो प्रेम है, वही तो ज्ञान है, वही तो शक्ति है, वही तो सुख है, वही तो पावनता है तो जब इनमें से किसी का भी प्रयोग करते हैं तत्क्षण वह जगह भर जाती है ! 

Friday, April 4, 2014

एक बूंद तेरी कृपा की जो बरसे

दिसम्बर २००५ 
परमात्मा की कृपा की एक झलक भी यदि मिल जाये तो भीतर एक उत्सव छाने लगता है. तब लगता है इस जगत में जिस क्षण भी जो भी हो रहा है, वही होना था. वही ठीक है, ऐसा ही लगता है, कोई शिकायत नहीं, जब कोई कामना ही नहीं तो शिकायत का प्रश्न ही पैदा नहीं होता. भीतर एक रस की धारा प्रकट होती है जिसने सब कुछ ढक लिया है, वही अब प्रमुख है. ईश्वर की अनुभूति की रस धार, वह निकट है, वही सुगंध बनकर समाया है, वही संगीत बनकर समाया है, वही प्रकाश बनकर और वही तरंग रूप में भीतर समाया है, वही अमृत बनकर भीतर रिस रहा है अनवरत...