Thursday, August 27, 2015

वही जीवन का सार है


जो एक रस है, अपार है, सदा साथ है. जो जागृत है, प्रेममय है, सदा सुख है. जो सहज है, सदा पुकार दे रहा है, सच्चा मित्र है, वही जीवन में बहार है. जो सदा खुला हुआ द्वार है, सबको समो लेता है, जिसके बिना जीवन असार है. वही जीवन का आधार है.

3 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (28.08.2015) को "सोच बनती है हकीक़त"(चर्चा अंक-2081) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

    ReplyDelete
  2. बहुत बहुत आभार राजेन्द्र जी

    ReplyDelete
  3. सुन्दर प्रस्तुति।

    ReplyDelete