Thursday, August 20, 2015

उसकी ओर जरा मुड़ देखें


वह परम चैतन्य जो इस सम्पूर्ण सृष्टि का नियंता है, जो ऋत है, नियम है, आनन्दमय है, नित है, ज्ञानमय है. सब प्राणियों को जानने वाला है. वह अगोचर है पर उसी के द्वारा देखा जाता है, उसी के द्वारा सुना जाता है, वह ईश्वर हर आत्मा को अपनी ओर उन्मुख करना चाहता है, कभी सुख कभी दुःख के द्वारा वह हमें सजग करता है. उसके प्रति जागरूक होना ही साधना का फल है. 

6 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (21.08.2015) को "बेटियां होती हैं अनमोल"(चर्चा अंक-2074) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

    ReplyDelete
  2. बहुत बहुत आभार राजेन्द्र जी !

    ReplyDelete
  3. बहुत सारगर्भित चिंतन...

    ReplyDelete
  4. >>
    साधक कर सकता है साधना
    असंभव नही थोड़ा सा मुश्किल है ।

    ReplyDelete
  5. कैलाश जी व सुशील जी, स्वागत व आभार !

    ReplyDelete