Monday, April 23, 2018

माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:

२३ अप्रैल २०१८ 
पृथ्वी दिवस पर लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनायें दीं, कविताएँ लिखीं, लेख लिखे और इस कटु सत्य से अवगत कराया कि मानव ने पृथ्वी के साथ कितना गलत व्यवहार किया है, और आज भी कर रहा है. इसका दुष्परिणाम भी हमें ही भुगतना पड़ रहा है. प्रतिदिन हजारों की संख्या में प्लास्टिक तथा खतरनाक धातुओं अथवा द्रव्यों के द्वारा नये-नये उपकरण बन रहे हैं, खराब होने पर जिनको नष्ट करना कठिन होता है. मोबाईल फोन हो अथवा टेलीविजन आदि इलेक्ट्रोनिक उपकरण, इनका कचरा पृथ्वी को प्रदूषित ही नहीं करता, मनुष्यों के लिए भी हानिकारक है. विकास और व्यापार के नाम पर कितना बड़ा धोखा मानव अपने आप को दे रहा है. सडकों पर बेतहाशा ट्रैफिक के कारण हवा का प्रदूषण सीमा पार कर चुका है पर हर दिन नये-नये वाहन फैक्ट्रियों से लाये जा रहे हैं. बढती हुई जनसंख्या के साथ-साथ मानव का बढ़ता हुआ लोभ आग में घी डालने का काम कर रहा है. आवश्यकता है ऐसे नीति निर्माताओं की जो सदा जीवन, उच्च विचार की जीवन शैली को बढ़ावा देते हुए, मानव को प्रकृति की ओर लौट चलने को प्रेरित करें.

2 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. बहुत बहुत आभार हर्षवर्धन जी !

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