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Saturday, June 1, 2024

भारत को आगे बढ़ना है

आज चुनाव का अंतिम दिन है, फिर प्रतीक्षा होगी परिणाम की। एक तरह से यह तय है कि अगली सरकार किसकी बनने वाली है। भारत जैसे महान और विशाल देश की सरकार भी मज़बूत व स्थिर होनी चाहिए। देश को आगे ले जाने में जितना हाथ सरकार का होता है, उतना ही नागरिकों का भी है, वे यदि अपने कर्त्तव्यों का पालन करेंगे तभी उनके अधिकारों की रक्षा हो पाएगी। यह नहीं भूलना चाहिए कि संविधान ने हमें अधिकारों के साथ कुछ कर्त्तव्य भी दिये हैं। देश में समस्याएँ अनेक हैं, लेकिन सबसे बड़ी जो समस्या है, वह भ्रष्टाचार की है। जो भी सदाचरण नहीं करता, वह दुराचरण कर रहा है, अर्थात उसका आचरण भ्रष्ट है। आज फ़ेक न्यूज़ का जमाना है, साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। इनके लिए भी कड़ा क़ानून बनाना चाहिए। टीवी पर या सोशल मीडिया में जिस किसी को कोई भी झूठ फैलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। अदालतों  में झूठी गवाही देने वालों पर भी कदम उठाया जाना चाहिए। सड़कों  पर गंदगी फैलाने वाले, पेड़ काटने वाले, जल व विद्युत का अपव्यय करने वाले लोगों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। आने वाली सरकार देश की उम्मीदों पर कितनी खड़ी उतरती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन देश के नेताओं को अब अगले पाँच वर्षों के लिए दलगत राजनीति से दूर रहकर भारत को आगे ले जाना का कार्य करना चाहिए। 


Wednesday, January 4, 2017

एक तलाश परम पद की

४ जनवरी २०१७ 
 हम सब सफल होना चाहते हैं. सबसे आगे भी रहना चाहते हैं. मानव  स्वभाव में ही यह गुंथा हुआ है कि वह थोड़े से संतुष्ट नहीं होता. सब कुछ पाकर भी उसे ऐसा लगता है कि कुछ अधूरा सा है. ऐसे में क्या जरूरी नहीं है कि हम थोड़ी देर थमकर गहराई से इसका कारण सोचें. जब हमसे काफी आगे वाला भी संतुष्ट नहीं है तो  वहाँ पहुच कर क्या हम संतुष्ट हो जायेंगे. इसका उत्तर भीतर से ही मिलेगा. संत कहते हैं हमारी तलाश तब तक जारी रहेगी जब तक हम उस पद को नहीं पा लेते जहाँ पूर्ण संतुष्टि है. वह पद अनंत है जिस पर हर कोई हर वक्त बैठ सकता है, उस की अभीप्सा हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है. किन्तु हम उस मार्ग को नहीं जानते जिससे वहाँ जाया जा सकता है. ध्यान ही वह मार्ग है, इस मार्ग पर चलने वाला यात्री किसी से आगे जाना नहीं चाहता वह अपनी यात्रा भीतर ही भीतर करता है और उस तक पहुँच जाता है. 

Thursday, January 23, 2014

दिल से जब उठती है प्रार्थना

जून २००५ 
सन्त जन कहते हैं, शरीर कुछ कहे, मन कुछ कहे तो मन की मानें,  मन कुछ कहे, बुद्धि कुछ कहे तो बुद्धि की मानें. लोग कुछ कहें और हृदय कुछ कहे तो हृदय की मानें. यदि जीवन में कोई समस्या आ जाये तो ईश्वर से पुकार करें प्रार्थना करें, एक बार नहीं बार-बार प्रार्थना करें. पुकार करते-करते एक बार फिर शांत हो जाएँ और अपने आप ही वह प्रार्थना उस तक पहुंच जाती है. वह हमारी बात को कब तक अनसुना कर सकता है. एहिक अथवा पारमार्थिक सामर्थ्य या सफलता पाने के लिए ईश्वर का स्मरण, चिन्तन तथा स्वयं को उसके आश्रित जानकर छोड़ देना ही प्रार्थना है. हमारा सूक्ष्म शरीर मृत्यु के बाद भी रहता है, प्रार्थना पूर्ण हृदय को मृत्यु के क्षण में अनोखी शांति का अनुभव होता है. प्रार्थना करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, वही हमारा मार्ग दर्शक है, उसकी शरण में जाना ही भक्त का प्रिय कार्य है.