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Thursday, May 14, 2020

चकित हुआ जो मन देखेगा

शिव सूत्र में शिव कहते हैं विस्मय योग की भूमिका है. योग में स्थित होने का अर्थ है समता में टिक जाना, जीवन में गहन सन्तुष्टि का अनुभव करना अथवा कृतकृत्य हो जाना. विस्मय से योग की इस यात्रा का आरंभ होता है. जब आकाश में स्थित अरबों तारों को देखकर मन चकित रह जाता है, सागर की गहराई में स्थित अनोखे प्राणी संसार को देखकर आश्चर्य होता है तो कुछ पलों के लिए मन ठहर जाता है. एक बच्चे के लिए सारा जगत ही विस्मय का कारण है इसीलिए वह आनंद से भरा होता है. सुबह का उगता हुआ सूरज, फूलों पर मंडराती तितलियाँ, जुगनुओं का टिमटिमाना उसके लिए विस्मयकारी हैं, पर जैसे -जैसे वह बड़ा होने लगता है किताबों में उनके बारे में पढ़कर उसे वे सब बातें सामान्य ही प्रतीत होती हैं. विज्ञान ने सब प्रश्नों के उत्तर खोज लिए हैं, किन्तु अभी भी प्रकृति के अनेक रहस्यों से वह पर्दा नहीं उठा पाया है. एक छोटा सा वायरस ही उसकी प्रतिष्ठा को धूल-धूसरित करने के लिए काफी है. 

Thursday, October 26, 2017

ॐ सूर्यायः नमः

२६ अक्तूबर २०१७ 
परमात्मा की कृपा का अनुभव करना जिसने सीख लिया, उसका सारा जीवन एक उपहार बन जाता है. हवा, धूप, जल पृथ्वी और आकाश के प्रति उसके हृदय में आदर और सम्मान का भाव उमगता है, वह इन्हें दूषित करने की बात तो सोच ही नहीं सकता. हमारे वैदिक ग्रन्थों में प्रकृति के लिए जो प्रार्थनाएं और स्तुतियाँ हैं, वह ऐसे ही ऋषियों ने गायीं हैं. विज्ञान ने मानव जीवन को सुख-सुविधाओं से तो सम्पन्न किया है पर उसके मन के कोमल भावों को जैसे चुरा लिया है. अब चाँद को देखकर शहरी नागरिक का मन उल्लसित नहीं होता, सूर्य को जल चढ़ाने की बात पर वह हँसता है. मन को पल्लवित और प्रफ्फुलित होने के लिए प्रकृति का आश्रय लेना ही होगा, यह उसी से बना है. छठ पूजा सूर्य के प्रति मानव मन की श्रद्धा का जीवंत उदाहरण है. 

Wednesday, August 16, 2017

अध्यात्म की डगर सुहानी

१६ अगस्त २०१७ 
जीवन प्रतिपल बांट रहा है. हजारों युगों से एक क्षण भी रुके बिना पवन का संचार हो रहा है. तेज गति से पृथ्वी सूर्य का परिभ्रमण कर रही है. सूर्य की रश्मियाँ नित नये प्राणियों को जन्माने में सहायक हैं. मानव के भीतर कल्पना और बुद्धिमत्ता के अद्भुत संयोग से नित नये अविष्कार हो रहे हैं. कला और विज्ञान की ऊंचाईयों को इस युग ने स्पर्श किया है. इतना सब कुछ होने पर भी अपने आस-पास देखने पर एक निराशा और अभाव का दर्शन होता है, जिसके लिए बढती हुई जनसंख्या तथा मानव का बढ़ता हुआ लोभ, आपसी मतभेद और सम्प्रदायों के नाम पर होती हुई हिंसा जैसे कुछ कारण गिनाये जा सकते हैं. अध्यात्म के पास इन सभी समस्याओं का इलाज है. अध्यात्म मानव को  मानव, प्रकृति तथा सम्पूर्ण सृष्टि से एकत्व की भावना का अनुभव कराता है. अध्यात्म आज के समय की मांग है.   

Wednesday, May 23, 2012

धर्म और विज्ञान


धर्म व्यक्ति का परिमार्जन करता है और विज्ञान वस्तु का परिमार्जन करता है. धर्म अंतर में ले जाता है, विज्ञान बाहर की ओर ले जाता है. अंतःकरण का परिमार्जन करने के बाद उसका उपयोग विज्ञान के लिये भी किया जा सकता है परहित के लिये. ऐसा विज्ञान दोषों के प्रति सजग होगा. और जो भी कार्य उसके द्वारा होगा, उसका कर्ताधर्ता एक ‘वही’ होगा, करने वाला निमित्त मात्र होगा. करने वाले का एक मात्र लक्ष्य तो अंतःकरण का परिमार्जन है सो वह निंदा का पात्र होने पर भी कभी अपमानित नहीं होगा, सुख-दुःख आदि में सम भाव में रहकर वह अपने अंतर आकाश को प्राप्त कर लेता है, जिस पर संसार रूपी बादल आते-जाते रहते हैं. पर वह सदा एक सा ही है.