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Thursday, February 14, 2019

जो लौट के फिर न आये


१५ फरवरी २०१९ 
पुलवामा में हुए आतंकी हमले से पूरा राष्ट्र व्यथित है. देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों को बलिदान करने वाले इन बहादुर सनिकों को हर कोई सारे भेदभाव भुलाकर हृदय से श्रद्धांजलि दे रहा है. क्रूरता की इस घटना ने सबके हृदयों को झकझोर कर रख दिया है. ऐसे में यह विचार कि उन परिवारों पर क्या बीत रही होगी जिनके प्रिय जन वैमनस्य की इस आग में झुलस गये, भीतर पीड़ा को गहरा कर जाता है. कल की रात उनके लिए कितनी भारी पड़ी होगी, और न जाने कितनी आने वाली रातों को उन्हें जागना पड़ेगा. हर भारतवासी इस दुःख की घड़ी में शहीदों के परिवारों के साथ है. अब समय आ गया है कि इस छद्म युद्ध को आमने-सामने लड़ा जाये, इस अपरोक्ष युद्ध की बजाय मामला आर-पार की लड़ाई से हल किया जाये. भारत ने कभी युद्ध के लिए पहले कदम नहीं उठाया, किन्तु जब दुश्मन को दूसरी भाषा नहीं आती हो तो उसे उसकी ही भाषा में जवाब देना होगा.

Thursday, August 29, 2013

हद, बेहद दोनों टपे

जनवरी २००५ 
हद टपे सो औलिया, बेहद टपे सो पीर
हद, बेहद दोनों टपे, ताको कहे फकीर

जैसे सोना आग में जाकर तपता है तो उसकी चमक बढ़ जाती है वैसे ही मन को जब साधना में तपाते हैं तो हम उस मूल तक पहुंच जाते हैं जिसे वेदों में गाया गया है. जिसे नेति-नेति कहकर अवर्णनीय कहा गया है. जो इस जगत का आधार है, इसे बनाता है, पालता है और नष्ट करता है. जो सत्य है, शिव है, सुंदर है. जो नित्य है, प्रेम है, आनन्द है. जो जानने योग्य है , पाने योग्य है. हमारे मन का भी वही मूल है. विचारों और भावों के रूप में मन की कई शाखायें हैं, उन पर कामनाओं के फल लगे हैं, हम ज्यादातर इन फलों में ही उलझे रहते हैं, कभी–कभी तने तक पहुंच जाते हैं, पर मूल तक पहुंचने के लिए हमें मनके पार जाना होगा. ध्यान तथा समाधि में हमें उस मूल की झलक मिलती है. और जिसने एक बार शांति रूपी गंगा जल पा लिए वह नाले के पानी का क्या करेगा, हीरा पाकर कोई कांच का टुकड़ा क्यों लेगा ? वह तो औरों को भी आनन्द रूपी हीरे को पाने के लिए प्रेरित करेगा.