दिखावा करना और दूसरों की नक़ल करने की आदत हमें जीवन में आगे बढ़ने से रोकती है। हम दिखावा करते हैं तो अहंकर को बढ़ावा देते हैं। दूसरों की नक़ल करते हैं तो असत्य को प्रश्रय देते हैं। संतुष्ट जीवन सत्य की राह से ही पाया जा सकता है, प्रामाणिकता वह पहली ईंट है जिस पर एक सुखद जीवन की इमारत खड़ी होती है। अहंकार चाहे कितना भी निर्दोष हो हमें अपने सच्चे स्वरूप से दूर ही रखता है। कोई भी व्यक्ति अपने आप में पूर्ण है क्योंकि दिव्य चेतना हर एक के भीतर विद्यमान है। अपनी निजता को पहचान कर हमें उस एकता को पाना है जिसके बाद न ही दिखावा करने की ज़रूरत रह जाती है और न ही किसी की तरह बनने की आकांक्षा।जैसे बगीचे में खिला हर पुष्प अनोखा है वैसे हर मानव अपनी निजी पहचान लेकर दुनिया में आता है, जन्म-जन्मांतर की यात्रा करके वह स्वयं की दिव्यता को पहचान कर अस्तित्त्व के साथ मिलकर कर्त्तव्य पथ पर आगे बढ़ता है।
Thursday, November 10, 2022
Sunday, October 25, 2020
विजय सभी की जब चाहें हम
आज दशहरा है,
हजारों वर्षों से असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक यह पर्व मानव को जीने का सही पथ
दिखाता आ रहा है। रावण के दस सिर उसके अहंकार के प्रतीक हैं और राम की विजय उनके
आदर्श की प्रतीक है। अब हमें यह निश्चय करना है कि जिस अहंकार का एक दिन नाश ही होना है उसे प्रश्रय
दें अथवा अपने मूल्यों पर दृढ़ रहकर एक ऐसे जीवन का निर्माण करें जो युगों-युगों से
मानव का आदर्श बना हुआ है। अहंकार व्यक्ति को सबसे तोड़ता है, पहले रावण अपने भाई
से दूर हो गया फिर अपनी पत्नी मंदोदरी से दूर हो गया, यहाँ तक कि अंतत: वह जगत से
ही चला गया। रामायण की कथा अपने भीतर न जाने कितने संदेश छुपाये है। आज जब हर कोई
महामारी के भय से आक्रांत है, समाज को मिलजुल कर एकदूसरे का सहयोग करते हुए जीने
की कला सीखनी होगी। हम देख ही रहे हैं कि एक व्यक्ति को अपना जीवन यापन करने के
लिए कितने ही लोगों का सहयोग चाहिए। सफाई कर्मचारी, आसपास के दुकानदार, डाक्टर,
दूध-सब्जी विक्रेता, बैंक कर्मचार सीमा पर जवान, मीडिया के लोग, अध्यापक और न जाने
कितने ही व्यक्तियों का सहयोग लेकर हमारा जीवन सुचारु रूप से आगे चल सकता है। हम समाज
का अंश भी हैं और समाज भी हैं, समाज हमसे है और हम समाज से हैं। यदि हर व्यक्ति सभी
के प्रति एक सद्भावना का विचार लेकर जीवन यापन करता है तो वह राम के पथ का अनुगामी
है, यदि किसी भी कीमत पर केवल अपने सुख की कामना करता है तो रावण ही उसका आदर्श है।