Tuesday, June 5, 2012

मानव ही मिल सकता उससे


अप्रैल २००३ 
हमारा जीवन उसकी कृपा से ही हमारी मुक्ति का साधन बनता है. पहला कदम तो हमने यही उठा लिया जब मानव जन्म मिला, दूसरा उसकी कृपा को अनुभव करना है. कृपा मिली तो तीसरा कदम है उसको जाने की इच्छा का होना, उस एक इच्छा ने अन्य सभी छोटी कामनाओं को अपने में समेट लिया क्यों कि उस एक को पाने से सब कुछ अपने आप मिल जाता है. उस एक को पाने के लिये जब हम एक कदम बढाते हैं तो वह हजार कदमों से हमारी ओर बढ़ता है. वह कैसे हरेक के हृदय में रहकर उसे निर्देशित करता है यह तो वही जाने पर वह करता जरूर है, उसे पुकारो तो वह तत्क्षण हाजिर होता है और अपने को जनाता भी है. उससे आध्यात्मिक सम्बन्ध बनाना है, देह बुद्धि से स्वयं को मुक्त करके आत्म बुद्धि की ओर ले जाना है.


5 comments:

  1. ईश्वर कृपा से जीवन हमारी मुक्ति का साधन बनता है.

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

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  2. यह सब तभी होगा जब अहं का विसर्जन हो।

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    1. दुःख ही अहं का भोजन है, इसे विसर्जित किये बिना भक्ति नहीं हो सकती

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  3. धीरेन्द्र जी व अनुपमा जी, आभार व स्वागत !

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