Friday, September 23, 2011

सच्चिदानन्द और हमारा मन


मार्च २००२ 

कृष्ण हमारे अंतरंग हैं, वह हमारे मन के उस कोने तक भी पहुंचे हुए हैं जहां हम स्वयं भी नहीं गए हैं. उनसे हमारा सम्बन्ध आदिकाल से है, सदा से है, नित्य है और जो भी सुख हम इस जग में होने वाले सम्बन्धों से पाते हैं वह मात्र उसका प्रतिबिम्ब है. हम प्रतिबिम्बों से कब तक मन बहला सकते हैं, हमारे सारे जप-तप नियम का उद्देश्य है मन की शुद्धि, ताकि हम उस सच्चिदानंद के दर्शन कर सकें, मन चेतन है सत है और आनंद स्वरूप है लेकिन हम मन के इस रूप को नहीं जानते जैसे कोई किसी महापुरुष के सम्पर्क में हो पर उसके गुणों से अनभिज्ञ हो तो उसे कोई अनुभूति नहीं होगी. परम सत्य को न जानने के कारण ही हम उससे दूर रहते हैं, जबकि वह हमें इसकी जानकारी देना चाहता है.

2 comments:

  1. आपकी डायरी का पन्ना रोज़ कुछ प्रेरक बातें ले कर आता है।

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