अक्तूबर २००१
उपवास के दिन जीवनी शक्ति सुव्यवस्थित होती है, उपवास का अर्थ है आत्मा के निकट रहना. शरीर व मन को इससे लाभ होता है, यदि यह लाभ भी ईश्वर अर्पण कर दें तो विशेष लाभ होता है. क्योंकि जीवात्मा परमात्मा का सनातन अंश है, जो कण-कण में व्याप्त है जो घट-घट में बोल रहा है जो स्वयं चेतन है पर जडरूप में प्रकट हुआ है, उसी की एक मात्र सत्ता है वही हमारा अपना आप है जिसे ढूँढने हमें कहीं जाना नहीं है बस मन को उसके साथ संयुक्त रखना है, मन का मूल वही है सो उपवास के दिन मन को अपने आप में टिकाये रखने का अभ्यास करना है. उपवास का अर्थ यही है.
अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार ,अनीता जी.
ReplyDeleteउपवास की सही विवेचना की है आपने.
उपवास करने का सही अर्थ समझाया है आपने ...
ReplyDeleteबहुत अच्छा लगा पढ़ के अनीता जी ...