Tuesday, June 3, 2014

एक सूत्र में जग पोया है

अप्रैल २००६ 
जब हम सुख के पीछे दौड़ते हैं तो दुःख पीछा करता है और जब ज्ञान के पीछे दौड़ते हैं तो आनन्द पीछे आता है. ज्ञान क्या है? एक ही चैतन्य सत्ता सबके भीतर व्याप्त है, वही जड़ में है वही चेतन में, मूलतः सभी एक ही तत्व से बना है. हमें भिन्नता को नहीं सबके भीतर व्याप्त सामान्य सत्ता को ही देखना है, वह सत्ता जो आनंद मयी, करुणा मयी तथा ज्ञानमयी है. सारे सद्गुण उसी में निवास करते हैं. सभी प्राणी भीतर से शुद्ध हैं, यदि किसी के प्रति हम दोष दृष्टि रखेंगे तो स्वयं को भी दोषी ही मानेंगे, तब अपने भीतर प्रवेश सम्भव ही नहीं होगा. वह परमात्मा जब पूर्ण है तो उसका जगत भी पूर्ण ही है. जो भी कमी है वह ऊपर-ऊपर है.  

4 comments:

  1. " दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोय ।
    जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे होय ॥"
    कबीर

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    1. सही कहा है शकुंतला जी

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  2. आपकी इस पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन की आज कि ब्लॉग बुलेटिन - श्रद्धांजलि गोपीनाथ मुंडे में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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    1. बहुत बहुत आभार !

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