हर नया दिन अपने साथ एक नयी प्रेरणा और नया संदेश लेकर आता है। आज शिक्षक दिवस है, बचपन से लेकर आज तक न जाने कितने ही शिक्षकों ने हमारे जीवन को गढ़ा है। सर्वप्रथम हमारे दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता और भाई-बहन हमारे शिक्षक होते हैं,। जीवन की पहली पाठशाला अर्थात घर, जो भी संस्कार बालमन पर डालता है, वह जीवन भर उसके साथ रहते हैं। ईमानदारी, सत्य, पुस्तकों से प्रेम, भक्ति, सेवा और अनुशासन का जो बीज बचपन में माता-पिता बच्चे के मन में रोपते हैं, उसी को शिक्षक अपने स्नेह से सींचते हैं। स्कूल और कॉलेज में जो शिक्षा दी जाती है, वह मात्र आजीविका प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाने की नहीं होती, वह जीवन में अपने पैर थिर करके खड़े होने की शक्ति भी प्रदान करती है। आज उन सभी शिक्षकों के प्रति आदर व सम्मान व्यक्त करने का दिन है, जिन्होंने अपने ज्ञान और प्रेम से हमारे मनों को प्रशस्त किया है। आज समाज में शिक्षा एक व्यापार बनती जा रही है,।मंहगे स्कूलों में जाने वाले बच्चे स्वयं को एक अभिमान से भर लेते हैं और उनके वे साथी जो ऐसे स्कूलों में नहीं पढ़ सकते, हीनभावना का शिकार हो जाते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस काल में आज शिक्षक की भूमिका भी बदल रही है। किंतु कंप्यूटर से कितनी भी सही जानकारी मिल जाये, एक शिक्षक की सजग दृष्टि विद्यार्थी के ह्रदय की भावनाओं को समझ लेती है, और बिना मानवीय स्पर्श से प्राप्त की गई उच्च से उच्च शिक्षा व्यक्ति को एक संवेदनशील नागरिक नहीं बना सकती।
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