मकर संक्रांति का उत्सव किसी न किसी रूप में सम्पूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है।पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू में इसे फसल का त्योहार माना जाता है, कृषकगण लोहरी और माघी के रूप में मनाते हैं; अग्नि के चारों ओर नृत्य करते हुए युवा नाचते और गाते हैं। उत्तर भारत में इसका नाम खिचड़ी है, तिल और गुड़ के साथ दाल-चावल का दान भी किया जाता है। राजस्थान और गुजरात में इसी पर्व को सूर्य के उत्तरी गोलार्ध के सूर्य के सम्मुख आने के कारण उत्तरायण कहा जाता है। इस दिन आकाश में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ायी जाती हैं। तमिलनाडु में यही पोंगल है जब खुले में चूल्हे पर दाल-चावल बनाए जाते हैं। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र,केरल और कर्नाटक में इसे संक्रांति कहा जाता है, तीन दिनों तक इस उत्सव को मनाते हैं। पश्चिम बंगाल में इसे पौष संक्रांति कहा जाता है। असम में इसे भोगाली बीहू कहा जाता है जब पीठा, तिल व नारियल के लड्डू व विभिन प्रकार के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।इस प्रकार यह पर्व पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ता है।