Monday, August 10, 2026

जीवन एक यात्रा सुंदर

जीवन एक यात्रा है, एक ऐसी यात्रा जिसमें हर पड़ाव पर कुछ बोझ हल्का होता जाता है। कितना सारा सामान उठाकर यात्री घर से निकलता है, पर मार्ग में उसे जिन-जिन वस्तुओं की ज़रूरत पड़ती जाती है, वे समाप्त होती जाती हैं और धीरे-धीरे गठरी हल्की होने लगती है। जिस स्थान पर यात्री को जाना है, वहाँ सब कुछ है, वहाँ कुछ भी ले जाने की ज़रूरत नहीं है। जो भी उसे चाहिए, केवल रास्ते के लिए है। अन्तिम लक्ष्य आने से पहले न जाने कितने पड़ावों से होकर उसे गुजरना है। बचपन, किशोरावस्था, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था, पढ़ाई, विवाह, नौकरी, सेवा निवृत्ति, धर्म, अध्यात्म, सेवा, रुचियाँ, कलाएँ, संगीत, मनोरंजन, भक्ति, प्रेम, घृणा, ईर्ष्या, सत्य, असत्य, जागरण, निद्रा, स्वप्न, कर्म, ज्ञान, अध्ययन, प्रयत्न, व्यायाम, विश्राम, ध्यान, योग और भी न जाने कितने पड़ाव उसके जीवन में आते हैं। हर जगह अपने पूर्व कर्मों के अनुसार वह देर-सेवर पहुँचता है, अपनी सामर्थ्य और रुचि के अनुसार हर पड़ाव पर नये कर्म करता है, नये कर्मफल बाँधता है। जो आगे की यात्रा में उसके काम आयेंगे। कर्मफलों की गठरी बाँधे वह चलता रहता है। जब तक इनकी समाप्ति नहीं होगी, यात्रा जारी रहेगी। इनका निपटारा ही यात्रा का अंत है। यह जन्मों-जन्मों की यात्रा है। यदि नये कर्म न करे, पुराने कर्मों के फलों को अनासक्त भाव से सह ले। हर सुख-दुख को साक्षी भाव से देखकर आगे बढ़ जाये तो धीरे-धीरे उनका बोझ कम होता जाता है, वह हल्का हो जाता है, ख़ाली हो जाता है और यही तो घर जाना है! 

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