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Saturday, May 23, 2015

निर्मल खेती हो मन में

अप्रैल २००९ 
जैसे खरपतवार खेत में बिना किसी प्रयास के अपने आप ही उग जाती है, तथा वह फसल को भी खराब करती है, वैसे ही मन में व्यर्थ के विचार हमारे सद्विचारों को भी प्रभावित करते हैं. हमें तो ऐसी खेती भीतर करनी है, जिसमें खर-पतवार जरा भी न हो. अभय, संतोष, पवित्रता जैसे सद्गुण हों तो ऐसी खेती हो सकती है.