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Friday, July 11, 2025

गुरु पूर्णिमा पर अनमोल संदेश

गुरुदेव कहते हैं  “न अभाव में रहो, न प्रभाव में रहो बल्कि स्वभाव में रहो”. अभाव मानव का  सहज स्वभाव नहीं है क्योंकि वास्तव में मानव पूर्ण है. अपूर्णता ऊपर से ओढ़ी गयी है, और चाहे कितनी ही इच्छा पूर्ति क्यों न हो जाये यह मिटने वाली नहीं. आप मुक्त होना चाहते हैं जबकि मुक्त तो आप हैं ही, बंधन खुद के बनाये हुए हैं, ये प्रतीत भर होते हैं. ईश्वर से आपका सम्बन्ध सनातन है, आप उसी के अंश हैं. अज्ञान वश जब आप इस सम्बन्ध को भूल जाते हैं तथा प्रेम को स्वार्थ सम्बन्धों में ढूंढने का प्रयास करते हैं तो दुःख को प्राप्त होते हैं.  आपको अपने जीवन के प्रति जागना है. कुछ बनने की दौड़ में जो द्वंद्व आप भीतर खड़े कर लेते हैं उसके प्रति जागना है. आपके मन को जो अकड़ जकड़ लेती है, असजगता की निशानी है. खाली मन जागरण की खबर देता है , क्योंकि मन का स्वभाव ही ऐसा है कि इसे किसी भी वस्तु से भरा नहीं जा सकता इसमें नीचे पेंदा ही नहीं है, तो क्यों न इसे खाली ही रहने दिया जाये. मुक्ति का अहसास उसी दिन होता है, जब सबसे आगे बढ़ने की वासना से मुक्ति मिल जाती है.