Showing posts with label नरेन. Show all posts
Showing posts with label नरेन. Show all posts

Tuesday, January 11, 2022

उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्त वरान्नि बोधत

नरेन से स्वामी विवेकानंद बनाने की गाथा से कौन भारतीय अपरिचित है।भारत के युवाओं के खोए हुए आत्मविश्वास को पुनः लौटने के लिए जितना बड़ा योगदान विवेकानंद ने किया है, ​​वह अतुलनीय है। उनके ओजस्वी भाषण पढ़कर आज भी हज़ारों युवा मन आंदोलित होते हैं। ​​​​​​​​उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्त वरान्नि बोधत” का संदेश देकर उन्होंने भारतीय होने के मूल उद्देश्य को स्वर दिए हैं। अनंत काल से जिस दिव्य वाणी का उद्घोष हमारे वेद करते आ रहे हैं, उसे भुलाकर जब देशवासी दासता, अशिक्षा, कुरीतियों और अंधविश्वास की ज़ंजीरों में जकड़े हुए थे, तब उनके रूप में जैसे नव आशा का बिगुल बजा हो या आकाश में कोई सूर्य दमका हो। उनके इस महान कार्य को संपादित करने में उनके गुरू की भूमिका से भी सभी परिचित हैं। स्वामी रामकृष्ण परमहंस के दिव्य ईश्वरीय प्रेम और दिव्य शक्तियों के कारण वह उनकी ओर खिंचते चले गए और उन्हीं के ज्ञान व उपदेशों को आत्मसात करके जगत में दिव्य संदेश देने निकल पड़े। आज उन्हीं महापुरुष की जयंती है।