हमने स्वतन्त्रता दिवस मनाया
और रक्षा बंधन भी, हर भारतीय के मन में दोनों के लिए आदर और गौरव का भाव है. देश
की रक्षा करने वाले वीरों की कलाई में बहनें जब राखी बांधती हैं तो उनके मनों में
आजाद हवा में साँस लेने का सुकून भर जाता है. सृष्टि में प्रतिपल कोई न कोई किसी
की रक्षा कर रहा है. वृक्ष के तने पर जब हम लाल धागा बांधते हैं तो हम उसके द्वारा
स्वयं को रक्षित हुआ मानते हैं. एक तरह से सुरक्षित होना ही स्वतंत्र होना है, इस
बार दोनों उत्सव एक ही दिन मनाए गये, इसके पीछे सृष्टि का कोई न कोई अदृश्य हाथ
अवश्य है. बहनें अथवा कुल का पुरोहित जब परिवार के बच्चों और युवाओं के हाथ में
डोरी बांधता है तो उसके पीछे कितनी ही अनाम भावनाएं छुपी होती हैं. जीवन भावनाओं से गुंथा हो तभी उसकी
शोभा होती है, वरना अंतर से रस विलीन हो जाता है. हृदय यदि श्रद्धा और प्रेम के
भावों से भीगा न हो तो उसमें मरुथल की तरह कैक्टस ही उग सकते हैं. भावना के फ़ूल ही
मानव को मानव बनाते हैं. देश के लिए कुर्बान होने का भाव किसी वीर के हृदय में जब
जगता है तब वह सारी कठिनाइयों को सहने के लिए तैयार हो जाता है. हमने अपने पूर्वजों
का ऋणी होना चाहिए जिन्होंने सुंदर उत्सवों की एक श्रंखला हमें सौंपी है, जिसकी
मूल भावना को अक्षुण रखते हुए हमें उन्हें मनाना है.
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Sunday, August 18, 2019
Monday, August 13, 2018
स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर
१४ अगस्त २०१८
कल स्वतन्त्रता
दिवस मनाया जायेगा, हर कोई प्रसन्न है और अपने तरीके से इस राष्ट्रीय उत्सव को
मनाने की तैयारी कर रहा है. भारत का छोटे से छोटा प्रदेश हो या सुदूर कोने में
स्थित कोई गाँव हो, किसी न किसी के द्वारा तिरंगा लहराया जायेगा. नीलगगन में
लहराते हुए तिरंगे को देखकर हर भारतीय का हृदय एक अनजाने उल्लस से भर जाता है. इस
देश में जन्म लेना कितना सौभाग्य से भरा है, इसका अहसास होता है. चाहे कोई विदेश
में हो या देश में स्वतन्त्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस पर देश की याद दिल में किसी
न किसी झरोखे से आ ही जाती है. देशभक्ति का कोई गीत कहीं बजता हो या टीवी पर लाल
किले से प्रधान मंत्री के भाषण की कोई बात सुनाई दे जाये, मन कृतज्ञता से भर जाता
है और हृदय में देशप्रेम की एक हिलोर जगने लगती है. राष्ट्र हमें एक सूत्र में बांधता है, एक पथ पर आगे ले जाता है, हमारे सुख-दुःख साझे हो जाते हैं, सीमा पर कोई
संकट हो तो करोड़ों हृदय एक साथ उसका सामना करने के लिए तत्पर होते हैं. राष्ट्र की
सीमाओं में हम स्वतंत्र हैं, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, अपने स्वप्नों
को पूर्ण करने के लिए, अपने भीतर की सोयी हुई शक्तियों को जगाकर देश को हर दृष्टि
से समर्थ बनाने के लिए. हर भारतीय हमारा अपना है, इस बात का अहसास विदेश में किसी
भारतीय को देखकर कितनी शिद्दत से होता है. आइये इस आजादी के जश्न को मनाते हुए हम
अपने उन लाखों भाई-बहनों को भी याद करें, जिन्होंने अपने श्रम और भावनाओं से इस
भारत भूमि को सींचा है, उन्हें भी जो युद्ध भूमि पर शहीद हुए. देश की आजादी में
अपना योगदान देने वाले सभी संतों, महापुरुषों, लेखकों, कवियों, और वीरों को नमन
करते हुए आप सभी को स्वतन्त्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें !
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