हमने स्वतन्त्रता दिवस मनाया
और रक्षा बंधन भी, हर भारतीय के मन में दोनों के लिए आदर और गौरव का भाव है. देश
की रक्षा करने वाले वीरों की कलाई में बहनें जब राखी बांधती हैं तो उनके मनों में
आजाद हवा में साँस लेने का सुकून भर जाता है. सृष्टि में प्रतिपल कोई न कोई किसी
की रक्षा कर रहा है. वृक्ष के तने पर जब हम लाल धागा बांधते हैं तो हम उसके द्वारा
स्वयं को रक्षित हुआ मानते हैं. एक तरह से सुरक्षित होना ही स्वतंत्र होना है, इस
बार दोनों उत्सव एक ही दिन मनाए गये, इसके पीछे सृष्टि का कोई न कोई अदृश्य हाथ
अवश्य है. बहनें अथवा कुल का पुरोहित जब परिवार के बच्चों और युवाओं के हाथ में
डोरी बांधता है तो उसके पीछे कितनी ही अनाम भावनाएं छुपी होती हैं. जीवन भावनाओं से गुंथा हो तभी उसकी
शोभा होती है, वरना अंतर से रस विलीन हो जाता है. हृदय यदि श्रद्धा और प्रेम के
भावों से भीगा न हो तो उसमें मरुथल की तरह कैक्टस ही उग सकते हैं. भावना के फ़ूल ही
मानव को मानव बनाते हैं. देश के लिए कुर्बान होने का भाव किसी वीर के हृदय में जब
जगता है तब वह सारी कठिनाइयों को सहने के लिए तैयार हो जाता है. हमने अपने पूर्वजों
का ऋणी होना चाहिए जिन्होंने सुंदर उत्सवों की एक श्रंखला हमें सौंपी है, जिसकी
मूल भावना को अक्षुण रखते हुए हमें उन्हें मनाना है.
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Sunday, August 18, 2019
Monday, August 7, 2017
यह राखी बंधन है ऐसा
७ अगस्त २०१७
रक्षा बंधन का अर्थ है अपनी सहज स्वीकृति और प्रेम से अन्य की रक्षा का वचन देकर उससे
बंध जाना. यह प्रेम का ऐसा अनोखा बंधन है जिसमें बाँधने वाला और बंधने वाला दोनों
स्वयं को धन्य अनुभव करते हैं. हमारे पुराणों में भी इस उत्सव का उल्लेख है, अर्थात
इसकी परंपरा अत्यंत प्राचीन है. पौराणिक कथाओं के अनुसार सर्वप्रथम इन्द्राणी ने
अपने पति की रक्षा के लिए मन्त्रों से सिद्ध सूत्र बाँधा था. द्रौपदी ने कृष्ण को
और लक्ष्मी ने राजा बलि को भी रक्षा सूत्र बाँधा था. पहले-पहल ब्राह्मण भी अपने
यजमानों को रक्षा सूत्र बाँधते थे. एक दूसरे के सम्मान की रक्षा के लिए इस सूत्र
को बाँधा जाता था. कालांतर में यह भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाया
जाने लगा. राखी का यह धागा मर्यादा का प्रतीक तो है ही, संकल्प की दृढ़ता का प्रतीक
है और साथ ही समाज में सभी की समानता और भाईचारे का प्रतीक भी है.
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उत्सव,
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रक्षा बंधन,
सम्मान
Thursday, August 18, 2016
यह राखी बंधन है ऐसा
१८ अगस्त २०१६
रक्षा का यह बंधन जो बांधता है और
जो बंधवाता है दोनों के लिए एक सा महत्व रखता है. एक मर्यादा का प्रतीक है यह
रेशमी धागा, मर्यादा मूल्यों की, प्रकृति के संरक्षण की और स्वयं को उच्च जीवन की
और ले जाने वाले पथ पर स्थिर रहने की. कलाई में बंधा यह याद दिलाता है कि संबंधों
की गरिमा को हर हाल में निभाना है, निभाना ही नहीं उनमें नित नये रंग भरने हैं. सीमाओं
में बंधी सुंदर जलधार ही नदी कहलाती है, जिसके दोनों तटों पर जीवन खिलता है. उसी
तरह जीवन को कुछ मर्यादाओं में बांधकर गति प्रदान करने का उत्सव है रक्षा बंधन,
जिसके कारण समाज में एकत्व और आत्मीयता की भावना का विकास होता है.
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