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Friday, January 23, 2026

बुद्धियोग जब सध जाएगा


मैं मेरे का भाव उत्पन्न करने वाली, राग-द्वेष पैदा करने वाली, एक दायरे में सीमित करने वाली तथा अखंड तत्व के प्रति उदासीन रहने वाली चार तरह की बुद्धियाँ अनर्थकारी हैं। ऐसी बुद्धि, जो ईश्वरीय ऐश्वर्य का अनुसन्धान करने वाली हो, प्रकृति के रहस्यों को समझने वाली, उसको सराहने वाली हो, अर्थकारिणी है। ईश्वर का सौन्दर्य चारों ओर बिखरा पड़ा है। ब्रह्मांड के असंख्य नक्षत्रों, ग्रहों, सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी और पृथ्वी पर बर्फीले पर्वत, नीला सागर, हरियाली, विशाल वन संपदा उसके ऐश्वर्य के रूप में हमें  प्राप्त है और उसका वैभव मीठे फलों, पंछियों की बोली और जीवन के पोषक तत्वों के रूप में हमें प्राप्त है।



Friday, July 6, 2012

कर्म की कला


मई २००३ 
हमारे कर्म मात्र हमारा ही उत्थान-पतन नहीं करते हैं वरन् वे हमारे आसपास के वातावरण के उत्थान-पतन के प्रति जिम्मेदार हैं, हमारी संतति को भी वे प्रभावित करते हैं. कर्म शुद्ध होंगे तो भविष्य ज्ञानमय होगा. मूल्यों के प्रति प्रतिबद्दता होगी तो ही ज्ञान हमारा सहायक होगा, कोरा ज्ञान हमें कहीं नहीं ले जाता.  हमारे कर्म ही हमारे आंतरिक भावों को प्रकट करते हैं. मनसा-वाचा-कर्मणा जो एकरस है भीतर-बाहर एक सा उसे अपने कहे, किये या सोचे पर एक क्षण के लिये भी पछताना नहीं पड़ता. सहज भाव से जो भी मार्ग में आये उसे अपने विकास के लिये साधित कर लें तो जीवन में अर्थ की सुगन्धि भर जाती है.