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Thursday, December 1, 2016

ऋत के साथ एक हुआ जो

२ दिसंबर  २०१६
जब हम ऋत  के नियमों का  पालन करते हैं, उसके साथ जो एक हो जाते हैं, तब  जीवन से द्वंद्व मिट जाता है. आचरण को जो शुद्ध कर लेता है बहुत सारी  परेशानियों से बच जाता है, किन्तु जो न प्रकृति के साथ एक होता है न ही सामान्य आचार  का सम्मान करता है वह दुःख को निमन्त्रण दे रहा होता है. परमात्मा अथवा प्रकृति हर हाल में सबके प्रति समान व्यव्यहार करती है हम स्वयं ही अपने भाग्य का निर्माण करते हैं. 

Monday, June 27, 2016

हुकुम रजाई चालिए

२८ जून २०१६ 
हमारे जीवन में आने वाला दुःख इस बात का सूचक है कि हम ऋत के नियम के प्रतिकूल चल रहे थे. हम दुःख को मिटाने का प्रयास तो करते हैं पर नियम के अनुसार नहीं चलते. यदि हमें लगता है किसी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति के कारण हमें दुःख है तो कारण वह व्यक्ति नहीं है बल्कि एक स्वतंत्र आत्मा पर अधिकार जताने का हमारा व्यर्थ प्रयास ही है, न ही वह वस्तु, सम्भवतः उसका सही उपयोग करना हमें नहीं आता, न ही कोई परिस्थिति हमारी मन:स्थिति को तब तक प्रभावित कर सकती है जब तक हम उसे अनुमति न दें. यदि कोई कार्य ऋत के अनुकूल है तो उससे सुख ही उत्पन्न होगा. प्रभाव या अभाव से मुक्त होकर स्वभाव में रहना ही ऋत का नियम है.