आज पृथ्वी दिवस है, अर्थात पृथ्वी के प्रति सम्मान दिखाने का दिवस ! पृथ्वी जो हमारी माँ है, जिसने हमें जीवन दिया है, जो हमारा पोषण करती है, जो हमें सुख देती है. इस अनंत ब्रह्मांड में जहाँ जीवन को खिलने का अवसर मिलता है, उस धरती का हम कितना ही गुणगान करें, कम है. वह पृथ्वी आज घायल है, अपशिष्ट पदार्थों का एक बड़ा भंडार उस पर बोझ बन गया है, वह हर कूड़े को खाद बना देती है पर उसे समय तो मिले. मानव कचरे का ढेर दिन-रात बढ़ाता ही जा रहा है, जल में रसायनों और प्लास्टिक डालता ही जा रहा है. मानव जब अपनी करनी से बाज नहीं आ रहा था तब शायद प्रकृति ने ही कोरोना के रूप में एक विपदा भेजी है. आज जब हम घरों में बैठे हैं, पृथ्वी अपने को स्वच्छ कर रही है अर्थात पृथ्वी अपना दिवस स्वयं ही मना रही है. वेदों में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कितने ही मन्त्र गाये गए हैं. आज आवश्यकता है उन्हें फिर से दोहराने की, जिससे हमारा यह सुंदर ग्रह फिर से अपनी खोयी हुई शांति और सुंदरता को प्राप्त कर सके. हरे-भरे जंगल, उनमें विचरते हुए निःशंक प्राणी और प्रकृति का संरक्षण करता हुआ मानव समाज फिर से अस्तित्त्व में आ सके.
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Wednesday, April 22, 2020
Monday, April 23, 2018
माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:
२३ अप्रैल २०१८
पृथ्वी दिवस पर लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनायें दीं, कविताएँ लिखीं, लेख लिखे और इस कटु सत्य से अवगत कराया कि मानव ने पृथ्वी के साथ कितना गलत व्यवहार किया है, और आज भी कर रहा है. इसका दुष्परिणाम भी हमें ही भुगतना पड़ रहा है. प्रतिदिन हजारों की संख्या में प्लास्टिक तथा खतरनाक धातुओं अथवा द्रव्यों के द्वारा नये-नये उपकरण बन रहे हैं, खराब होने पर जिनको नष्ट करना कठिन होता है. मोबाईल फोन हो अथवा टेलीविजन आदि इलेक्ट्रोनिक उपकरण, इनका कचरा पृथ्वी को प्रदूषित ही नहीं करता, मनुष्यों के लिए भी हानिकारक है. विकास और व्यापार के नाम पर कितना बड़ा धोखा मानव अपने आप को दे रहा है. सडकों पर बेतहाशा ट्रैफिक के कारण हवा का प्रदूषण सीमा पार कर चुका है पर हर दिन नये-नये वाहन फैक्ट्रियों से लाये जा रहे हैं. बढती हुई जनसंख्या के साथ-साथ मानव का बढ़ता हुआ लोभ आग में घी डालने का काम कर रहा है. आवश्यकता है ऐसे नीति निर्माताओं की जो सदा जीवन, उच्च विचार की जीवन शैली को बढ़ावा देते हुए, मानव को प्रकृति की ओर लौट चलने को प्रेरित करें.
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