आज पर्यावरण दिवस है, हवा दूषित है, कहीं बारिश होती है तो होती ही चली जाती है, कहीं मानसून झलक दिखा कर चला जाता है। कहीं बाढ़ से लोग परेशान हैं तो कहीं सूखे से। वैज्ञानिक कहते हैं, ओज़ोन लेयर में छेद हो गया है, सूरज की हानिकारक किरणें भी धरती पर आ रही हैं। धरती का हाल तो और भी दयनीय है, गंदगी, रासायनिक खाद, कीटनाशकों ने भूमि की गुणवत्ता समाप्त कर दी है। सब्ज़ियों में स्वाद नहीं आता, आए भी तो कैसे, इंजेक्शन लगाकर सब्ज़ियों का आकार बड़ा किया जाता है। दवाइयाँ डालकर फल उगाए जाते हैं। चाय जो लोग बड़े भरोसे से सुबह-शाम पीते रहते हैं, उसके बाग़ानों में सबसे ज़्यादा विषैले कीटनाशकों का छिड़काव होता है। नदी किनारे उगने वाले शाक भी सुरक्षित नहीं, नदियाँ अब बहुत मैल धो चुकीं, अब उनकी क्षमता से बाहर हो गया है। इतना सब होने के बाद भी प्रकृति ने अपना रूप-सौंदर्य खोया नहीं है, क्योंकि उसके पास स्वीकार भाव है, वह मानवों से अपने प्रति हो रहे दुर्व्यवहार के प्रति शिकायत नहीं करती। अब मानव को चाहिए कि यदि उसे भी सहज शांत रहना सीखना है तो प्रकृति के निकट जाना होगा, विकास के नाम पर, अधिक से अधिक धन कमाने की लालसा में उसका अति दोहन नहीं करना होगा; तभी दोनों के मध्य संतुलन सधेगा और हर ऋतु अपने समय पर आएगी। फलों की मिठास लौट आएगी और हवा की सुगंध भी। पर्यावरण दिवस पर हमें प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को और सुदृढ़ बनाना होगा।
Sunday, June 5, 2022
Monday, March 21, 2022
आख़िर कब यह युद्ध थमेगा
Tuesday, January 12, 2021
जीवन का अधिकार सभी को
जीवन की कितनी ही परिभाषाएँ दार्शनिकों और साहित्यकारों तथा अनेकों ने दी हैं. कोई इसे यात्रा कहता है तो कोई घटनाओं का एक क्रम। कोई कहता है जीवन सीखने का नाम है, आगे बढ़ने का नाम है. किसी ने यह भी कहा है कि जीवन एक पुस्तक है जिसे पढ़ना सदा ही शेष रहता है. आज तक हमारे जीवन में जो भी घटा है वह अनुभूत हो चुका है किन्तु अगले ही पल क्या होने वाला है, कोई नहीं जानता। जीवन की पुस्तक का अगला पन्ना जब खुलेगा तभी उसे पढ़ सकते हैं. वैज्ञानिक और भविष्यवक्ता अवश्य पूर्वानुमानों के आधार पर अवश्य कुछ सुझाव देते रहते हैं, पर हम उन पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. जलवायु परिवर्तन और महामारियों के बारे में भी पहले कितनी ही बार सचेत किया गया है, किन्तु इक्कीसवीं सदी में भी विकसित देश युद्ध और हथियारों में धन लगाना ज्यादा आवश्यक समझते रहे हैं. आवश्यकता है कि सभी देश आपसी विवादों को सुलझाकर पूरी धरती को एक परिवार मानकर हरेक को सम्मान से जीने का अधिकार दें, क्योंकि आज के हालातों में विश्व का कोई भी देश अपने बलबूते पर किसी समस्या का सामना नहीं कर सकता.