अप्रैल २००३
समय मन के सापेक्ष है, जब हम स्वयं को छोटे मन के साथ एक मानते हैं तब समय काटे
नहीं कटता और जब विशाल मन अर्थात आत्मा में स्थित हों तो समय उड़ने लगता है तब हमें
भूत, भविष्य और वर्तमान का ज्ञान ही नहीं रहता. हमारे जीवन में युक्ति, भक्ति,
शक्ति और मुक्ति क्रमशः आती है. पहले युक्ति से जीवन को उन्नत बनाना, फिर भक्ति का
उदय, भक्ति से ही शक्ति मिलती है, जिससे मन धीरे-धीरे संसार का अवलम्बन छोड़ता जाता
है, मुक्ति तो परम लक्ष्य है वही विशाल मन है. जीवन में ध्यान, समाधि, मौन हो तो
मनः प्रसाद मिलता है, सौम्यता जीवन में झलकती है. आत्मविद्या जब तक नहीं मिली तब
तक हम विद्यार्थी हैं.