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Sunday, May 3, 2020

विपदा में जो हाथ बढ़ेगा

विश्व के अन्य कई देशों की तरह भारत में भी लॉक डाउन अभी  खत्म नहीं हुआ है, कोरोना ने पूरी दुनिया में मजबूती से अपने पैर पसार लिए हैं और वह जल्दी विदा लेने के मूड में नजर आता नहीं दिख रहा है. वैज्ञानिक अभी तक कोई वैक्सीन नहीं खोज पाए हैं, हमें ही इससे बचाव करते हुए जीना सीखना होगा. अनावश्यक घर से बाहर न निकलना पहला नियम है. भीड़भाड़ से बचाव इससे स्वतः ही हो जायेगा. सरकार ने जिन्हें छूट दी है वे दुकानें तथा प्रतिष्ठान खुल रहे हैं किन्तु उनमें जाने से पहले हरेक को सजगता बरतनी है. मास्क का उपयोग तथा सेनिटाइजर का बार-बार प्रयोग स्वभाव में ही शामिल कर  लेना होगा. जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक है, उन्हें बेशर्त दूसरों की सहायता के लिए आगे आना होगा. इतिहास में ऐसे अवसर कभी-कभी ही आते हैं जब पूरी मानवता का अस्तित्त्व ही खतरे में पड़ जाता है, तब दुनिया समर्थ और सक्षम का आश्रय लेती है. जिस तरह से भी हो सके हमें मदद के लिए हाथ बढ़ाना है. हर धर्म में दान धर्म का बहुत महत्व बताया गया है. सरकार ने अपने भंडार असमर्थों के लिए खोल दिए हैं, हमें भी उसकी सहायता के लिए तत्पर रहना होगा.

Friday, April 17, 2020

अंतरशक्ति जगायेगा जो


शक्ति का संधान किये बिना राम भी रावण का संहार नहीं कर सके थे. आज कोरोना रूपी रावण का संहार करना है इसके लिए भी सभी देशवासियों को अपने भीतर शक्ति का संधान करना है. सबसे पहले इस लंबी लड़ाई को लड़ने के लिए मन में अनवरत उत्साह बनाए रखना जरूरी है. वैज्ञानिक और स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात एक करके इसका निदान खोज रहे हैं, आज नहीं कल इसका वैक्सीन बन ही जायेगा. इस भरोसे को बनाये रखने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है, जो आती है शक्ति की साधना से. हर दिन कुछ न कुछ नया रचना या करना है, चाहे छोटे से छोटा कृत्य ही क्यों न हो. उदारता से भी शक्ति बढ़ती है और मन की गहराई में प्रेम और करुणा की जो भावना सुप्त है उसे जगाने से भी. कृतज्ञतापूर्वक अपने जीवन में मिले साधनों में से कुछ को औरों के लिए त्यागने से भी. विश्व, देश और समाज में आज जो स्थिति है उसको स्वीकार करके ही उसके पार जाने का मार्ग मिल सकता है.