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Tuesday, October 14, 2014

समाधान मिलता है भीतर

मार्च २००७ 
जो हमारा आज का विचार है, वही भविष्य की क्रिया है. विश्व क्रांति से अधिक हमें वैचारिक क्रांति की आवश्यकता है. वैचारिक परिवर्तन हमें अंतर्मुख होना सिखाता है, जिससे हम भीतर से मार्गदर्शन पाने लगते हैं. ध्यान से भीतर जो शक्ति उत्पन्न होती है वह स्वतः ही शुभता में ले जाती है. लोकसंग्रह के लिए तब कोई प्रयास नहीं करना पड़ता. ऊपरी सुन्दरता के दायरे से निकल कर जो विचार की सुन्दरता में प्रवेश करता है वह मानो अपने भाग्य का निर्माता बन जाता है. वह स्वमान में रहने लगता है और दूसरों का सम्मान करना सीखता है. स्वमान का अर्थ है अपने भीतर छिपे आत्मा के अमूल्य गुणों पर भरोसा. पवित्रता, प्रेम, सरलता, करुणा तथा सत्यता हमारे भीतर ही हैं, इसका प्रत्यक्ष अनुभव होने पर ही यह भरोसा उत्पन्न होता है.

Monday, June 23, 2014

जीवन नया बनाया उसने

जुलाई २००६ 
सद्गुरु जीवन में एक क्रांति ला देते हैं, हमारी पुरानी सारी मान्यताओं को छुड़ाकर हमें नया बना देते हैं. साधना के पथ पर चलते हुए हम नये से हो जाते हैं और प्रतिक्षण बढ़ते रहते हैं. हमारे भीतर की जड़ता समाप्त हो जाती है. हम आत्मा में रहें तभी वृद्धि को प्राप्त होते हैं, मन तो जड़ है, वह सिकुड़ना जानता है, मन रक्षात्मक है, आत्मा प्रेमात्मक है, वह विस्तार को प्राप्त होती है.