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Friday, November 3, 2017

नानक दुखिया सब संसार

४ नवम्बर २०१७ 
गुरूपर्व अर्थात सिखों के प्रथम गुरू नानक का जन्मोत्सव. प्रकाश का यह पर्व हमें अंतर ज्योति जगाने की प्रेरणा देने आया है. भारत वासी युगों से संतों के प्राकट्य को प्रकाश के साथ जोड़ते आये हैं, इसी कारण भगवान बुद्ध और महावीर स्वामी का जन्मदिन भी पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. सभी संतों ने मानव को भीतर के आत्मा रूपी प्रकाश को जगाने की युक्ति दी है. मानव देह को यदि एक घर के समान समझें तो आत्मा इसकी मालिक है, मन, बुद्धि आदि सेवक हैं. जैसे मालिक के न होने पर सेवक मनमानी करते हैं, और घर की हालत बिगड़ जाती है, वैसे ही आत्मा का प्रकाश यदि नहीं जगा है तो मन सीमित ज्ञान व पुराने संस्कारों के अनुसार ही घर को चलाता है, जिसका परिणाम सुख-दुःख के रूप में मानव को भोगना पड़ता है. आत्मा यदि सजग होगी तो सहज ही शांति और आनंद का अनुभव करेगी.

Monday, March 31, 2014

आपे आप सुरंजन सोई

नवम्बर २००५ 
नानक के अनुसार, “कीता न होई थापया न जाई, आपे आप सुरंजन सोई” ! ईश्वर तो सदा ही है, उसे बस अनुभव करना है. कहीं से लाना नहीं है वह, कुछ करने से नहीं, कुछ भी न करने से वह प्रकट होता है, ध्यान साधना से जब पल भर के लिए मन खाली हो जाता है तो एक अनोखी पुलक से भर जाता है. जैसे न जाने कौन सी निधि इसे मिल गयी हो. हमारे भीतर कितने खजाने भरे पड़े हैं, हम चाहें तो तत्क्ष्ण उन्हें पा सकते हैं. हमारे मन व्यर्थ की कल्पनाओं में खोये रहते हैं और जो निधियां हम सहज ही पा सकते हैं, जन्म भर उनसे वंचित ही रह जाते हैं. परम के प्रति मन में श्रद्धा का भरना ऐसी घटना है जो जीवन को बदल कर रख देती है. हम सुख स्वरूप परमात्मा को कुछ-कुछ पहचानने लगते हैं.