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Monday, May 20, 2024

बुल्ला ! की जाना मैं कौन

अधिकतर लोग यह मानते हैं कि बाहर से जीवन में कोई कमी न दिखाई देते हुए भी उनके दिल में इक खुदबुद सी लगी रहती है। कोई व्यक्ति वास्तव में चाहता क्या है, उसे इसकी खबर भी नहीं होती।संभवत: हर किसी की तलाश एक ऐसी शांति या सुकून की है, जो सदा-सदा के लिए भीतर का ख़ालीपन भर दे।वस्तुओं से बाज़ार भरा पड़ा है, किंतु वहाँ ऐसा कुछ नहीं मिल सकता जो इस अभाव को भर दे। इस तरह जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, यह बेचैनी दिनबदिन बढ़ती जाती है । एक दिन यही किसी न किसी रोग के रूप में प्रकट होती है।बेचैनी ज्यों ज्यों बढ़ती है, मन का सुकून घटता जाता है कोई इसे परिवार, मित्रों या चिकित्सक से बयान करता है, कोई इसके बारे में कुछ नहीं बताता। स्वयं ही  ही मुक्त होने का उपाय खोजता है, किंतु वह यह भूल जाता है कि जिस मन ने इसे खड़ा किया है, वही मन इससे मुक्ति का उपाय कैसे बता सकता है।जो इसे दूर करे, वह दवाई कहीं बाहर नहीं मिलती। इसीलिए शास्त्रों में कहा गया है, गुरु की शरण में जाना चाहिए, सत्संग करना चाहिए। गुरु और शास्त्र बताते हैं कि मन की तलाश अपने  भीतर जाकर ही मिट सकती है। स्वयं से दूरी ही मानव को बेचैन करती है। जब तक कोई अपने होने को वास्तव में अनुभव नहीं कर लेता, बाहर के सुख और सुविधाएँ उसे वह शांति प्रदान नहीं कर सकते, जो वह चाहता है। 


Thursday, September 14, 2017

सादा जीवन उच्च विचार यही सुखी जीवन का सार

१५ सितम्बर २०१७ 
यह काल संक्रमण का काल है. मूल्य बदल रहे हैं, संस्कृतियाँ और सभ्यताएं बदल रही हैं. देशों की सीमाएं बदल रही हैं. विश्व की उन्नति का आधार आर्थिक विकास माना जाने लगा है. व्यापारिक संबंध बढ़ रहे हैं, देश निकट आ रहे हैं. किन्तु इस सबके साथ मानव को विकास की बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ रही है. एक पीढ़ी पहले तक भी एक व्यक्ति को परिवार का सहयोग और प्रेम सहज ही मिल जाता था, जिसके कारण उसके भीतर मानवीय मूल्यों की स्थापना घर से ही आरम्भ हो जाती थी और विद्यालय उसमें विस्तार करता था. आज एकल परिवार होने के कारण बच्चे उस स्नेह और विश्वास से वंचित हैं, स्कूल भी इस कमी को पूरा नहीं कर पा रहा है. आये दिन स्कूलों में होने वाले हादसे अभिभावकों और बच्चों में एक भय की भावना भर रहे हैं. यदि मानव अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर ले, लोभ और दिखावे पर नियन्त्रण रखे. ध्यान और योग को अपना कर सुख के अविनाशी स्रोत को अपने भीतर ही खोज ले तो स्वतः ही उसकी यह अंधी दौड़ समाप्त हो जाएगी.