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Wednesday, April 9, 2014

जिसने सूरज चाँद बनाया

जनवरी २००६ 
जीवन कितना अद्भुत है, कितना सुंदर तथा कितना भव्य ! नीला आकाश, हरे-भरे बगीचे, मधु से युक्त पवन तथा शीतल जल. किसी को भी इसे बिगाड़ने का कोई अधिकार नहीं. जीवन की कद्र करनी है, जीवन को खत्म करने का हमें क्या अधिकार है. इसे देखकर मन कभी आश्चर्य से खिल जाता है कभी मुग्ध हो जाता है. उस अनदेखे परमात्मा की स्मृति आते ही उसके लिए श्रद्धा से भर जाता है. यह अद्भूत संसार उसने उन सबके लिये रचा है, जो इसकी खुशबू को अपने अंदर समोते हैं, इसके रस को पीते हैं, इसकी नरमाई-गरमाई को महसूसते हैं. हम मानव कितने भाग्यशाली हैं, हमें ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में रखा गया है उसकी महिमा का गान करने के लिए, उसके गुणों को धारण करने के लिए. उसके आनंद का अनुभव करने के लिए. उसकी लीला में सहभागी बनने के लिए.

Thursday, September 13, 2012

वही हमें पथ दिखलाता है


जिसने परम लक्ष्य तय कर लिया है, वह हर परिस्थिति में समभाव बनाये रखेगा, हर स्थिति को अपने लक्ष्य की ओर ले जाने वाला बनाएगा. लक्ष्य का स्मरण कर्त्तव्य से च्युत नहीं होने देता. इस जगत में हम अकेले ही आए हैं, और अकेले ही जाना है यह बीच का जो वक्त है, वही हमें मिलजुल कर बिताना है पर याद इतना ही रखना है की यह बीच का समय हमारी सारी ऊर्जा को ही न ले ले,  हमें अंतर में ध्यान के अमृत को पीना है. शरीर में होने वाली संवेदनायें किसी न किसी भावना की द्योतक हैं, यदि संवेदना को देखें और देखते-देखते वह खत्म हो जाये तो वह भावना भी नहीं रहती. ध्यान में तभी हमारी सभी नकारात्मक भावनाएं खत्म होने लगती हैं, और हम साफ-स्वच्छ बाहर निकल आते हैं. ध्यान एक तरह से स्नान ही हुआ न, भीतरी स्नान. फिर जब मन विधायक हो जाता है तब प्रज्ञा प्रकट होती है. अभी रास्ता लम्बा है पर रास्ता भी कितना मोहक है, अद्भुत है, परमात्मा का संग इसे और भी मोहक और आनन्दप्रद बना देता है.