Showing posts with label ऋतू. Show all posts
Showing posts with label ऋतू. Show all posts

Saturday, February 11, 2017

लय और ताल सधे जीवन में

११ फरवरी २०१७ 
प्रकृति के हर काम में एक लय झलकती है. दिन-रात के होने और ऋतु परिवर्तन के अनुसार मन के भी मौसम होते हैं। उन्हें समझकर जो उनके अनुरूप स्वयं को ढाल लेता है, वह स्वस्थ रह सकता है। प्रातःकाल मन शांत होता है, उस समय का उपयोग स्वाध्याय व साधना में लगे तो दिन भर ताजगी रहेगी. जीवन में संगीत तभी प्रकटेगा जब एक लय हमारे मन, वचन तथा कर्मों में होगी। नियत समय पर नियत कार्य होते रहें तो  मन देह से ऊपर जा सकता है, अन्यथा सामान्य जीवन से परे भी एक अलौकिक जीवन है, इसकी ओर दृष्टि ही नहीं जाती।

Friday, April 3, 2015

एक ही मौसम रहता है तब

दिसम्बर २००८ 
एक साधक के जीवन में दो ही ऋतुएं होती हैं, एक जब वह ईश्वर या गुरू से निकटता का अनुभव करता है और दूसरी वह जब उनसे दूरी का अनुभव करता है. लेकिन ईश्वर की कृपा इतनी असीम है कि वह साधक को दूसरी ऋतु में देखना नहीं चाहती. वह पुनः उसी निकटता का अनुभव कराना चाहती है जिसे पाकर भीतर प्रेम की लहर दौड़ जाती है, परम शांति का अनुभव होता है. भीतर कृपा का सागर लहरा रहा है. खुदा का अर्थ ही है वह जो खुद आये, हमें केवल उसका इंतजार करना है पूरे मन के साथ. जब मन पूरी तरह ठहर जाता है, तब ही कालातीत से परिचय होता है.