सत्य का अनुभव हो जाना सरल है, पर उस पर टिके रहना उतना ही कठिन। मन पुराने संस्कारों को आसानी से पकड़ लेता है और साधक को जो एक बहुमूल्य वस्तु मिली थी, उससे वह वंचित हो जाता है। वास्तव में प्रत्येक मनुष्य हर तरह के दुखों से मुक्ति चाहता है, किंतु जो कर्म उससे होते हैं, वे विपरीत फल देने वाले निकलते हैं। जब तक हम ध्यान के द्वारा मन के पार जाकर उस स्थान पर टिकना नहीं सीख लेते, मन नीचे ले जाने का हर प्रयास करता है। देह और मन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। स्वस्थ रहने का अर्थ है, रोग रहित देह, पीड़ा रहित मन और सदा कुछ नया सीखने को उत्सुक बुद्धि। स्वास्थ्य के लिए नियमित व्यायाम और सात्विक भोजन, मन के लिए सत्संग और बुद्धि के लिए स्वाध्याय यदि मिलता रहे तो तीनों आनंदित रह सकते हैं। देह में यदि कोई रोग हो गया है तो तुरंत उसका समाधान खोजना चाहिए। उसका इलाज करना चाहिए। मन यदि अवसाद से ग्रस्त है तो ध्यान सीखकर मन को शांत रखने का उपाय खोजना होगा और नवीन विषयों की जानकारी लेते हुए बुद्धि को भी उसकी खुराक देनी होगी। चेतना की ऊर्जा को यदि समुचित मार्ग नहीं मिलता तो वह भटक जाती है और जीवन जो आनंद का एक स्रोत बन सकता था, एक पहेली बनकर रह जाता है।
Showing posts with label लय. Show all posts
Showing posts with label लय. Show all posts
Thursday, May 30, 2024
Wednesday, October 20, 2021
जीवन में जब लय जगेगी
जीवन की सम्भावनाएँ अनंत हैं। हमारे अनंत जन्म हो चुके हैं फिर भी हम बार-बार इस जगत में लौटते हैं क्योंकि जीने के सही तरीक़े हमने सीखे नहीं हैं। यदि जीवन स्वकेंद्रित होगा तो अन्यों के साथ अन्याय होने की सम्भावना बनी ही रहेगी। यह मानव देह हमें उपहार में मिली है, श्वासें अनमोल हैं। हमारे भीतर अनछुई शक्ति के भंडार हैं जिन्हें माँगने पर ही दिया जाएगा। कुछ ही पल ऐसे होते हैं जब हम पूर्ण होश में होते हैं, ऐसा होश जो हमें हमारी स्मृति दिला देता है, देह से परे देखने की क्षमता देता है।यदि जीवन में एक लय हो, आगे बढ़ने की ललक हो तो हर पल कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।
Wednesday, July 12, 2017
छंद बद्ध हो जब जीवन
१३ जुलाई २०१७
जैसे प्रकृति में एक लय है, एक छंद है, एक नियमबद्धता है, एक अनुशासन है, वैसा ही
यदि जीवन में घटित होने लगे तो जीवन आनंदपूर्ण हो सकता है. समय आने पर कैसे अपने
आप ही पत्तियां झर जाती हैं, वृक्ष अपनी कुरूपता को सहज ही स्वीकार करता है और
उसमें भी एक सौन्दर्य का निर्माण हो जाता है. वृद्धावस्था को यदि सहजता से स्वीकार
लिया जाये तो उसमें भी एक सौन्दर्य है. अस्वस्थता में भी मन कैसे स्थिर हो जाता
है, अकड़ चली जाती है, बुखार में भी मुख पर एक चमक आ जाती है, इन्हें निमन्त्रण
नहीं देना है पर यदि किसी कारण वश देह स्वस्थ नहीं है, तो उसे पहले स्वीकार करके
फिर आवश्यक कदम उठाने हैं. मन यदि ‘हाँ’ की भाषा सीख गया है, तो उसकी ऊर्जा एक लय
में बंध जाती है, नकार की भाषा उसे अस्त-व्यस्त कर देती है.
Saturday, February 11, 2017
लय और ताल सधे जीवन में
११ फरवरी २०१७
प्रकृति के हर काम में एक लय झलकती है. दिन-रात के होने और ऋतु परिवर्तन के अनुसार मन के भी मौसम होते हैं। उन्हें समझकर जो उनके अनुरूप स्वयं को ढाल लेता है, वह स्वस्थ रह सकता है। प्रातःकाल मन शांत होता है, उस समय का उपयोग स्वाध्याय व साधना में लगे तो दिन भर ताजगी रहेगी. जीवन में संगीत तभी प्रकटेगा जब एक लय हमारे मन, वचन तथा कर्मों में होगी। नियत समय पर नियत कार्य होते रहें तो मन देह से ऊपर जा सकता है, अन्यथा सामान्य जीवन से परे भी एक अलौकिक जीवन है, इसकी ओर दृष्टि ही नहीं जाती।
Subscribe to:
Posts (Atom)