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Thursday, June 6, 2019

निकट आ गया जो स्वयं के ही



दिन-रात, सुबह-शाम, सर्दी-गर्मी सभी कुछ तो अपने आप हो रहे हैं. जन्म-मृत्यु, स्वास्थ्य-रोग, सुख-दुःख, यश-अपयश भी अपने आप आते-जाते हैं. मानव की भूमिका इसमें कहाँ आरम्भ होती है ? कितना अच्छा हो कि पूर्वजों की सीख के अनुसार वह दिन में पूरी निष्ठा से कार्य करे और रात्रि को विश्राम करे. सुबह-शाम दोनों समय संध्या करे अर्थात कुछ देर शांत होकर बैठे और अस्तित्त्व के साथ अपनेपन को अनुभव करे. सर्दी में सर्दियों का आहार-विहार अपनाये और गर्मियों में उस ऋतु के अनुसार स्वयं को ढाले. जन्म-मृत्यु दोनों का स्वागत करे, स्वास्थ्य-रोग दोनों में पथ्य-अपथ्य का ध्यान रखे. सुख-दुःख में मन को समता में रखे. यश-अपयश को साक्षी भाव से सहन करे. आज विश्राम खो गया है, संध्या खो गयी है, ऋतुु के अनूरूप आहार-विहार खो गया है और भक्ष्य-अभक्ष्य का विवेक भी नहीं रहा. जन्म को रोका जा रहा है, मृत्यु को दूर खिसकाया जा रहा है. नकली मुस्कान को सुख का पर्यायवाची मान लिया गया है और दुःख से सीखने की बजाय किसी न किसी तरह उसे भुलाने का प्रयत्न चलता है. स्वयं ही स्वयं का यशगान होता है और जरा सी उपेक्षा आहत कर देती है. मानव जैसे अस्तित्त्व से दूर हो गया है. जरूरत है एक बार फिर अपने भीतर लौटने की, और सब कुछ बदल जाता है.

Friday, September 28, 2018

शक्ति ही शिव तक ले जाये


२९ सितम्बर २०१८ 
दिन उगता है और समाप्त हो जाता है, रात्रि के आँचल में प्रकृति शांत होकर सो जाती है. हम भी दिन भर के कार्यों के बाद देह और मस्तिष्क को विश्राम देने के लिए सो जाते हैं. नींद में हम कहाँ होते हैं, किसी को नहीं पता, गहरी निद्रा में न किसी को अपने होने का भान रहता है, न अपने ज्ञान और ऐश्वर्य का, उस समय राजा और रंक मानो एक हो जाते हैं. नींद में ही स्वप्न काल भी होता है, कभी अतीत के कभी भविष्य के और कभी अपने वर्तमान जीवन से जुड़े विचार स्वप्न बनकर हमें दिखाई पड़ते हैं. जागृत अवस्था में जो मन में संकल्प उठते हुए देखता है, स्वप्न अवस्था में जो दृश्य देखता है, निद्रा में जो सुख का अनुभव करता है, वह द्रष्टा स्वयं अनदेखा ही रह जाता है. संत कहते हैं, इतने बड़े मायाजाल का एक ही प्रयोजन है उस मायापति से नाता जोड़ लेना जो इस द्रष्टा को चेतना प्रदान करता है. नवरात्रि का उत्सव इसी संदेश को लेकर बार-बार आता है, शक्ति की उपासना करके हम शिव तक पहुँचें.