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Friday, September 28, 2018

शक्ति ही शिव तक ले जाये


२९ सितम्बर २०१८ 
दिन उगता है और समाप्त हो जाता है, रात्रि के आँचल में प्रकृति शांत होकर सो जाती है. हम भी दिन भर के कार्यों के बाद देह और मस्तिष्क को विश्राम देने के लिए सो जाते हैं. नींद में हम कहाँ होते हैं, किसी को नहीं पता, गहरी निद्रा में न किसी को अपने होने का भान रहता है, न अपने ज्ञान और ऐश्वर्य का, उस समय राजा और रंक मानो एक हो जाते हैं. नींद में ही स्वप्न काल भी होता है, कभी अतीत के कभी भविष्य के और कभी अपने वर्तमान जीवन से जुड़े विचार स्वप्न बनकर हमें दिखाई पड़ते हैं. जागृत अवस्था में जो मन में संकल्प उठते हुए देखता है, स्वप्न अवस्था में जो दृश्य देखता है, निद्रा में जो सुख का अनुभव करता है, वह द्रष्टा स्वयं अनदेखा ही रह जाता है. संत कहते हैं, इतने बड़े मायाजाल का एक ही प्रयोजन है उस मायापति से नाता जोड़ लेना जो इस द्रष्टा को चेतना प्रदान करता है. नवरात्रि का उत्सव इसी संदेश को लेकर बार-बार आता है, शक्ति की उपासना करके हम शिव तक पहुँचें.

Saturday, June 3, 2017

बँटती रहे ऊर्जा पल-पल

४ जून २०१७ 
जीवन प्रतिदिन एक नई सुबह का वरदान देता है. हर रात अपने साथ सारी थकान ही नहीं ले जाती, विश्राम के पलों में नई ऊर्जा से मन को भर देती है. जिसने हँसकर सुबह का स्वागत किया वह अपनी दोपहर में कुछ रचने ही वाला है, और उसकी संध्या भी अनंत के प्रति आभार से भर जाएगी. रात्रि का स्वागत भी वह एक तृप्त हृदय के साथ करेगा. जिसने आपने आनन्द को प्रकृति के साथ साझा करना सीख लिया प्रकृति भी उसके मार्ग में चमत्कार बुन देती है. प्रकृति पल-पल अपना सब कुछ बाँट रही है, हमें भी इस जीवन में जो कुछ भी मिला है, उसी से मिला है, उसी की भांति देने की कला जब किसी को आ जाये तो जीवन का हर पल नया लगता है. 

Tuesday, August 13, 2013

जागे जागे रहना है

दिसम्बर २०१३ 
हम रात्रि को ही स्वप्न नहीं देखते, दिन में भी एक विचार धारा जो भीतर निरंतर चलती रहती है, हमारी स्वप्नावस्था का ही एक रूप है, हमारे अनजाने में ही जो विचार विचरण करते है वही तो रात्रि में दृश्यों के रूप में दिखने लगते हैं. यदि हमें अपने भीतर स्थित पवित्र चैतन्य का बोध सदा बना रहे तो हम भीतर अखंड मौन का अनुभव कर सकते हैं. हम उससे बचे तभी तक रह सकते हैं जब तक सोये हैं. हमारे भीतर जो चेतना है, वह सहज है, वह है ही, उसे होना ही है, न उससे कुछ बढ़कर है न उससे कुछ कम है, सारे भेद ऊपरी हैं, भीतर एक ही तत्व है, वही परम सत्य है.