Showing posts with label लोकतंत्र. Show all posts
Showing posts with label लोकतंत्र. Show all posts

Saturday, May 11, 2024

लोकतन्त्र का पर्व मनाएँ


भारत में चुनावों का मौसम चल रहा है। यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व है।चारों ओर एक उत्सव का सा माहौल नज़र आता है। हर सड़क, गली, नुक्कड़ और चौपाल पर चहल-पहल है।देश ही नहीं विदेशों में भी भारत के चुनाव का जादू चल गया लगता है। कनाडा निज्जर और अमेरिका पन्नू पर अटक गया है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को जहाँ प्रश्रय मिलता है, ऐसे भारत को विश्व सलाहें दे रहा है। जिस देश में विवाह के अवसर पर ‘गालियों’ को लोग सिर माथे लगाते हैं। होली पर लट्ठमारने की सुविधा दी जाती है; भला वहाँ चुनावों में एक-दूसरे की बखिया उधाड़ने में लोग पीछे क्यों रह जायें।आज सभी पार्टियों के नेतागण जमकर मन की भड़ास निकाल रहे हैं।विदेशी भूमि पर भारत की अखंडता को मिटाने का षड्यंत्र रचने वालों को महिमामंडित किया जा रहा है। ऐसे लोगों द्वारा जो यूक्रेन और इज़राइल को लाखों डालर देकर हज़ारों निर्दोषों को मरवा चुके है, भारत पर विदेशी भूमि पर लोगों को मरवाने का आरोप लगाया जा रहा है। यह विडंबना नहीं तो और क्या है ! आज विदेशों में पढ़ने वाले कितने ही छात्र हिंसा का शिकार हो रहे हैं।पड़ोसी देश की भाषा बोलने वाले कुछ लोग भारत में बैठे हैं, जो उनके बम का हवाला देकर भयभीत कर रहे हैं। वह अपने क़ब्ज़े वाले कश्मीर को आटा तक मुहैया नहीं करवा पा रहा और भारत के कश्मीर में उसे खून की नदियाँ बहती दिखायी पड़ती हैं; पता नहीं कौन सा चश्मा उसने चढ़ाया हुआ है। इस चुनाव में कई तेजस्वी और निर्भीक महिलाओं ने भी समाज को दिशा दिखाने का बीड़ा उठाया है।यू ट्यूबर्स की भी आज जैसे बाढ़ आ गई है, जो भविष्यवाणियाँ कर रहे हैं। सबसे बड़े भविष्यवक्ता तो मतदाता हैं, जिनके हाथ में भारत का भविष्य है। आधा रास्ता तय हो गया है, आधा सफ़र शेष है। जो इसी तरह टीवी डिबेट्स देखकर हँसते-हँसाते निकल जाएगा। जय भारत ! जय श्रीराम !  


Sunday, January 24, 2021

जहाँ विजय है लोकतंत्र की

कल देश का बहत्तरवाँ गणतंत्र दिवस है, कोरोना के कारण इस बार परेड में कुछ बदलाव हुए हैं, मुख्य अतिथि भी नहीं आ रहे हैं। राजधानी में किसानों के आंदोलन के कारण भी कुछ अनिश्चितता का वातावरण है। किन्तु कुछ भी हो, देश वासियों के दिलों में गणतंत्र दिवस मनाने का जोश उतना ही है। पिछले एक वर्ष में बहुत कुछ ऐसा हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था, लंबा लॉक डाउन, मजदूरों की घर वापसी, कोरोना के कारण अस्पतालों में मरीजों की बेतहाशा भर्ती, आर्थिक मंदी, स्कूलों का बंद होना और भी कितनी कठिनाइयों को झेलते हुए यह पिछला वर्ष पूरी दुनिया के लिए एक चिंता की वजह छोड़ गया है। इन सबके बावजूद मानव आगे की ओर देख रहा है,  वैक्सीन का निर्माण हो चुका है, कोरोना पर काफी हद तक नियंत्रण हो चुका है। भारत विश्व के कई देशों को इसकी वैक्सीन भेजने में सक्षम है, यह बात भी हमारे लिए कितने गर्व की है। एक बार फिर राजपथ पर सुंदर झाँकियाँ, बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा सैन्य बलों का प्रदर्शन एक बार फिर यह सिद्ध कर देगा कि आपदा चाहे कितनी भी भीषण क्यों न हो मानवता अपना मार्ग ढूंढ ही लेती है। अंधेरा कितना भी घना क्यों न हो उजाले को रोक नहीं सकता। बांग्ला देश की आजादी की स्वर्णजयंती के अवसर पर वहाँ का एक सैन्य बैंड भी गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेगा।  

 

Monday, April 1, 2019

सेवा धर्म निभायेगा जो


चुनावों का मौसम है, सभी दल अपनी अपनी उपलब्धियों को गिना रहे हैं और तरह-तरह के वायदों से मतदाताओं को लुभाने का प्रयत्न कर रहे हैं. पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने के बाद यदि कोई नेता अपने क्षेत्र में पुनः वोट मांगने जाता है तो उसका काम ही यह तय करता है, वह इस बार जीतेगा या नहीं. समय के अनुसार चलने वाले नेता को सम्मान भी मिलता है और समर्थन भी, सामन्ती विचारधारा के दिन खत्म हुए, अब जनता का राज है और राजनीति में उसी को जाना चाहिए जिसके भीतर सेवा करने का भाव हो. अब राजनीति को धर्म के अनुसार चलना होगा. बदलते हुए समय में सच्चे, कर्मनिष्ठ और देशभक्त नेता ही राजनीति में सफल हो सकते हैं. कितना विशाल है हमारा देश और कितने भिन्न विचारधारा के लोग यहाँ निवास करते हैं, सभी को खुश करना एक नेता या पार्टी के लिए सम्भव नहीं है, लेकिन लोकतंत्र में जितना हो सके सबको साथ लेकर काम करना होता है. भारत जैसे विशाल देश में जनता भी कितने ही वर्गों में बंटी है, पर लोकतंत्र की कितनी महानता है कि सबके मत की कीमत एक समान है. यहाँ हरेक नागरिक को वोट देने का अधिकार है और अपनी पसंद की सरकार चुनने का भी.

Sunday, March 10, 2019

लोकतंत्र की सदा विजय हो


चुनावों की तिथियाँ घोषित हो चुकी हैं और आचार संहिता भी लागू हो गयी है. उम्मीद की जा सकती है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में हिंसा रहित और निष्पक्ष चुनाव होंगे. एक उत्सव की तरह सारा देश इसमें पूरे मन से भाग लेगा और आने वाले दिनों में समाचार पत्रों व टीवी पर विरोधी पक्ष एक दूसरे के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे. एक सामान्य भारतीय नागरिक होने के नाते इतनी उम्मीद तो रखी जा सकती है कि कोई भी दल आचार संहिता का उल्लंघन नहीं करेगा और देश का वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहेगा. देश के भीतर तथा आदेश के बाहर कुछ ऐसे तत्व हैं जो आपसी विवादों का गलत उपयोग करते हैं, उन्हें इसका अवसर न मिले ऐसा प्रयास हर नागरिक व पार्टी को करना ही चाहिए. कृपया आने वाले चुनावों में अपना मत देकर लोकतंत्र के इस उत्सव में आप सभी सम्मिलित हों.