आज चुनाव का अंतिम दिन है, फिर प्रतीक्षा होगी परिणाम की। एक तरह से यह तय है कि अगली सरकार किसकी बनने वाली है। भारत जैसे महान और विशाल देश की सरकार भी मज़बूत व स्थिर होनी चाहिए। देश को आगे ले जाने में जितना हाथ सरकार का होता है, उतना ही नागरिकों का भी है, वे यदि अपने कर्त्तव्यों का पालन करेंगे तभी उनके अधिकारों की रक्षा हो पाएगी। यह नहीं भूलना चाहिए कि संविधान ने हमें अधिकारों के साथ कुछ कर्त्तव्य भी दिये हैं। देश में समस्याएँ अनेक हैं, लेकिन सबसे बड़ी जो समस्या है, वह भ्रष्टाचार की है। जो भी सदाचरण नहीं करता, वह दुराचरण कर रहा है, अर्थात उसका आचरण भ्रष्ट है। आज फ़ेक न्यूज़ का जमाना है, साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। इनके लिए भी कड़ा क़ानून बनाना चाहिए। टीवी पर या सोशल मीडिया में जिस किसी को कोई भी झूठ फैलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। अदालतों में झूठी गवाही देने वालों पर भी कदम उठाया जाना चाहिए। सड़कों पर गंदगी फैलाने वाले, पेड़ काटने वाले, जल व विद्युत का अपव्यय करने वाले लोगों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। आने वाली सरकार देश की उम्मीदों पर कितनी खड़ी उतरती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन देश के नेताओं को अब अगले पाँच वर्षों के लिए दलगत राजनीति से दूर रहकर भारत को आगे ले जाना का कार्य करना चाहिए।
Saturday, June 1, 2024
Saturday, May 11, 2024
लोकतन्त्र का पर्व मनाएँ
भारत में चुनावों का मौसम चल रहा है। यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व है।चारों ओर एक उत्सव का सा माहौल नज़र आता है। हर सड़क, गली, नुक्कड़ और चौपाल पर चहल-पहल है।देश ही नहीं विदेशों में भी भारत के चुनाव का जादू चल गया लगता है। कनाडा निज्जर और अमेरिका पन्नू पर अटक गया है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को जहाँ प्रश्रय मिलता है, ऐसे भारत को विश्व सलाहें दे रहा है। जिस देश में विवाह के अवसर पर ‘गालियों’ को लोग सिर माथे लगाते हैं। होली पर लट्ठमारने की सुविधा दी जाती है; भला वहाँ चुनावों में एक-दूसरे की बखिया उधाड़ने में लोग पीछे क्यों रह जायें।आज सभी पार्टियों के नेतागण जमकर मन की भड़ास निकाल रहे हैं।विदेशी भूमि पर भारत की अखंडता को मिटाने का षड्यंत्र रचने वालों को महिमामंडित किया जा रहा है। ऐसे लोगों द्वारा जो यूक्रेन और इज़राइल को लाखों डालर देकर हज़ारों निर्दोषों को मरवा चुके है, भारत पर विदेशी भूमि पर लोगों को मरवाने का आरोप लगाया जा रहा है। यह विडंबना नहीं तो और क्या है ! आज विदेशों में पढ़ने वाले कितने ही छात्र हिंसा का शिकार हो रहे हैं।पड़ोसी देश की भाषा बोलने वाले कुछ लोग भारत में बैठे हैं, जो उनके बम का हवाला देकर भयभीत कर रहे हैं। वह अपने क़ब्ज़े वाले कश्मीर को आटा तक मुहैया नहीं करवा पा रहा और भारत के कश्मीर में उसे खून की नदियाँ बहती दिखायी पड़ती हैं; पता नहीं कौन सा चश्मा उसने चढ़ाया हुआ है। इस चुनाव में कई तेजस्वी और निर्भीक महिलाओं ने भी समाज को दिशा दिखाने का बीड़ा उठाया है।यू ट्यूबर्स की भी आज जैसे बाढ़ आ गई है, जो भविष्यवाणियाँ कर रहे हैं। सबसे बड़े भविष्यवक्ता तो मतदाता हैं, जिनके हाथ में भारत का भविष्य है। आधा रास्ता तय हो गया है, आधा सफ़र शेष है। जो इसी तरह टीवी डिबेट्स देखकर हँसते-हँसाते निकल जाएगा। जय भारत ! जय श्रीराम !
Friday, March 17, 2023
जीवन जब उत्सव बन जाए
पल भर की चूक से सड़क पर दुर्घटना घट जाती है। थोड़ी सी असावधानी हमें भारी पड़ सकती है।। हम जीवन को अपने लिए उपहार भी बना सकते हैं और बोझ भी। दो तरह के गीत सुनने को मिलते हैं, पहली तरह हैं, दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा, जीवन है अगर ज़हर तो पीना ही पड़ेगा ! और दूसरी तरफ़ उत्साह से भरा यह गीत, ज़िंदगी इक सफ़र है सुहाना ! या ज़िंदगी प्यार का गीत है, इसे हर दिल को गाना पड़ेगा ! हम जीवन के सफ़र को हल्का बना लें या बोझिल, यह चुनाव हमें ही करना है। योग इसी कला का नाम है। परमात्मा से हमारी पहचान हो जाए तो जैसे बड़े आदमी से पहचान होते ही आदमी निश्चिंत हो जाता है, हमें कोई भय नहीं रहता। हम संसार की दलदल में नहीं फँसते, सदा कमल की तरह जल के ऊपर तिरते रहते हैं।