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Saturday, June 1, 2024

भारत को आगे बढ़ना है

आज चुनाव का अंतिम दिन है, फिर प्रतीक्षा होगी परिणाम की। एक तरह से यह तय है कि अगली सरकार किसकी बनने वाली है। भारत जैसे महान और विशाल देश की सरकार भी मज़बूत व स्थिर होनी चाहिए। देश को आगे ले जाने में जितना हाथ सरकार का होता है, उतना ही नागरिकों का भी है, वे यदि अपने कर्त्तव्यों का पालन करेंगे तभी उनके अधिकारों की रक्षा हो पाएगी। यह नहीं भूलना चाहिए कि संविधान ने हमें अधिकारों के साथ कुछ कर्त्तव्य भी दिये हैं। देश में समस्याएँ अनेक हैं, लेकिन सबसे बड़ी जो समस्या है, वह भ्रष्टाचार की है। जो भी सदाचरण नहीं करता, वह दुराचरण कर रहा है, अर्थात उसका आचरण भ्रष्ट है। आज फ़ेक न्यूज़ का जमाना है, साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। इनके लिए भी कड़ा क़ानून बनाना चाहिए। टीवी पर या सोशल मीडिया में जिस किसी को कोई भी झूठ फैलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। अदालतों  में झूठी गवाही देने वालों पर भी कदम उठाया जाना चाहिए। सड़कों  पर गंदगी फैलाने वाले, पेड़ काटने वाले, जल व विद्युत का अपव्यय करने वाले लोगों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। आने वाली सरकार देश की उम्मीदों पर कितनी खड़ी उतरती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन देश के नेताओं को अब अगले पाँच वर्षों के लिए दलगत राजनीति से दूर रहकर भारत को आगे ले जाना का कार्य करना चाहिए। 


Saturday, May 11, 2024

लोकतन्त्र का पर्व मनाएँ


भारत में चुनावों का मौसम चल रहा है। यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व है।चारों ओर एक उत्सव का सा माहौल नज़र आता है। हर सड़क, गली, नुक्कड़ और चौपाल पर चहल-पहल है।देश ही नहीं विदेशों में भी भारत के चुनाव का जादू चल गया लगता है। कनाडा निज्जर और अमेरिका पन्नू पर अटक गया है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को जहाँ प्रश्रय मिलता है, ऐसे भारत को विश्व सलाहें दे रहा है। जिस देश में विवाह के अवसर पर ‘गालियों’ को लोग सिर माथे लगाते हैं। होली पर लट्ठमारने की सुविधा दी जाती है; भला वहाँ चुनावों में एक-दूसरे की बखिया उधाड़ने में लोग पीछे क्यों रह जायें।आज सभी पार्टियों के नेतागण जमकर मन की भड़ास निकाल रहे हैं।विदेशी भूमि पर भारत की अखंडता को मिटाने का षड्यंत्र रचने वालों को महिमामंडित किया जा रहा है। ऐसे लोगों द्वारा जो यूक्रेन और इज़राइल को लाखों डालर देकर हज़ारों निर्दोषों को मरवा चुके है, भारत पर विदेशी भूमि पर लोगों को मरवाने का आरोप लगाया जा रहा है। यह विडंबना नहीं तो और क्या है ! आज विदेशों में पढ़ने वाले कितने ही छात्र हिंसा का शिकार हो रहे हैं।पड़ोसी देश की भाषा बोलने वाले कुछ लोग भारत में बैठे हैं, जो उनके बम का हवाला देकर भयभीत कर रहे हैं। वह अपने क़ब्ज़े वाले कश्मीर को आटा तक मुहैया नहीं करवा पा रहा और भारत के कश्मीर में उसे खून की नदियाँ बहती दिखायी पड़ती हैं; पता नहीं कौन सा चश्मा उसने चढ़ाया हुआ है। इस चुनाव में कई तेजस्वी और निर्भीक महिलाओं ने भी समाज को दिशा दिखाने का बीड़ा उठाया है।यू ट्यूबर्स की भी आज जैसे बाढ़ आ गई है, जो भविष्यवाणियाँ कर रहे हैं। सबसे बड़े भविष्यवक्ता तो मतदाता हैं, जिनके हाथ में भारत का भविष्य है। आधा रास्ता तय हो गया है, आधा सफ़र शेष है। जो इसी तरह टीवी डिबेट्स देखकर हँसते-हँसाते निकल जाएगा। जय भारत ! जय श्रीराम !  


Friday, March 17, 2023

जीवन जब उत्सव बन जाए

पल भर की चूक से सड़क पर दुर्घटना घट जाती है। थोड़ी सी असावधानी हमें भारी पड़ सकती है।। हम जीवन को अपने लिए उपहार भी बना सकते हैं और बोझ भी। दो तरह के गीत सुनने को मिलते हैं, पहली तरह हैं, दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा, जीवन है अगर ज़हर तो पीना ही पड़ेगा ! और दूसरी तरफ़ उत्साह से भरा यह गीत, ज़िंदगी इक सफ़र है सुहाना ! या ज़िंदगी प्यार का गीत है, इसे हर दिल को गाना पड़ेगा ! हम जीवन के सफ़र को हल्का बना लें या बोझिल, यह चुनाव हमें ही करना है। योग इसी कला का नाम है। परमात्मा से हमारी पहचान हो जाए तो जैसे बड़े आदमी से पहचान होते ही आदमी निश्चिंत हो जाता है, हमें कोई भय नहीं रहता। हम संसार की दलदल में नहीं फँसते, सदा कमल की तरह जल के ऊपर तिरते रहते हैं। 


Thursday, April 16, 2020

ज्ञान का जो सम्मान करे मन


जहाँ ज्ञान का तिरस्कार होता है वहाँ सजगता खो जाती है. वास्तव में बेहोश होकर ही हम अज्ञानी हो सकते हैं. हम जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है, पर चुनते वही हैं जो हमें पसंद है, यह जानते हुए भी कि यह हमारे के लिए सही नहीं है. सन्त कहते हैं यदि हम प्रेय मार्ग को चुनेंगे तो दुःख से बचना असम्भव है, श्रेय मार्ग को चुनेंगे तो जीवन में दुःख का कोई स्थान ही नहीं रहेगा. इसका अर्थ यह नहीं है कि जीवन में कोई दुखद परिस्थिति नहीं आएगी, बल्कि हम हर स्थिति में समता में रहना सीख जायेंगे. प्रेय मार्ग हमें कमजोर बनाता है, हम केवल सुख के अभिलाषी बन जाते हैं. जरा सा दुःख हमें अपने केंद्र से विचलित कर देता है. श्रेय मार्ग का चयन हमें भीतर से दृढ़ता प्रदान करता है. इसके लिए पहला कदम है, राग-द्वेष से मुक्त होना, हम यदि जीवन को जिस रूप में वह मिलता है स्वीकार करना चुनते हैं तो एक स्थिरता भीतर प्रकट होती है.यह स्थिरता हमें सही-गलत में भेद करना सिखाती है और सही का चुनाव करने का बल देती है. श्रेय मार्ग का चयन तब सहज हो जाता है. 

Tuesday, May 28, 2019

हम उस देश के वासी हैं



चुनाव आये, हफ्तों तक चले और अब परिणाम भी आ गया. देशवासियों ने मिलकर एक निर्णय लिया और एक मजबूत सरकार को चुना. आज हर भारतीय एक नये भरोसे और विश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है. प्रधानमन्त्री ने कहा है पारदर्शिता और परिश्रम के बिना विकास का मार्ग तय नहीं किया जा सकता. हर व्यक्ति सुख चाहता है, सुख का आधार है हमारी पारमार्थिक जीवनशैली. जिसमें प्रकृति का सम्मान हो और अपने बुजुर्गों का आदर हो. जिसमें हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति हमारे श्रम से होती हो, न कि किसी अनुदान से. स्वच्छता की जिम्मेदारी हर कोई निभाए और सामाजिक बुराइयों को दूर करने का बीड़ा भी सब मिलकर लें. देश हम सबका है और इसको समृद्धि की और ले जाना हमारे ही हाथ में है. यदि हम सरकार की नीतियों को जमीन पर उतरते हुए देखना चाहते हैं तो हमें भी अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह करके सहयोग करना होगा.

Wednesday, April 17, 2019

चुनना जिसने सीख लिया है



जैसे मानव देह में मस्तिष्क का मुख्य स्थान है, वैसे ही एक देश में संसद का. मस्तिष्क यानि बुद्धि, जिस प्रकार का ज्ञान बुद्धि में होगा, वैसा ही निर्देश कर्मेन्द्रियों व ज्ञानेन्द्रियों को मिलेगा. यदि बुद्धि सात्विक होगी तो आहार-विहार भी सात्विक होगा, कर्म भी शुद्ध होंगे और शरीर स्वस्थ रहेगा. स्वस्थ का अर्थ है देह का मालिक यानि आत्मा अपने आप में स्थित रहेगा, जिससे अनवरत ऊर्जा का प्रवाह देह, मन इन्द्रियों को मिलता रहे. यदि देह अस्वस्थ होती है तो चेतना रुग्ण अंग में ही सिमट जाती है और ऊर्जा का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है. इसी प्रकार यदि संसद में देश और धर्म के प्रति समर्पित सांसद होंगे तो वैसा ही निर्देश अधिकारियों और जनता को मिलेगा. यदि सांसद निष्ठावान होंगे तो विकास भी सही दिशा में और शीघ्र होगा. देश समर्थ बनेगा, समर्थ का अर्थ है अपनी रक्षा करने में सक्षम और जनता के हर वर्ग को एक सुंदर व स्वस्थ वातावरण प्रदान करने में सक्षम. यदि ऐसे व्यक्ति चुनकर आते हैं जो दीर्घसूत्री हैं, उच्च आदर्शों के प्रति जिनके मन में सम्मान नहीं है, जो निज हितों को देश से ऊपर रखते हैं तो विकास की गति अवेरुद्ध हो जाएगी. देश कमजोर बनेगा. निर्णय हमें करना है कि हम चरित्रवान और कर्मठ लोगों को चुनें.  

Monday, April 1, 2019

सेवा धर्म निभायेगा जो


चुनावों का मौसम है, सभी दल अपनी अपनी उपलब्धियों को गिना रहे हैं और तरह-तरह के वायदों से मतदाताओं को लुभाने का प्रयत्न कर रहे हैं. पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने के बाद यदि कोई नेता अपने क्षेत्र में पुनः वोट मांगने जाता है तो उसका काम ही यह तय करता है, वह इस बार जीतेगा या नहीं. समय के अनुसार चलने वाले नेता को सम्मान भी मिलता है और समर्थन भी, सामन्ती विचारधारा के दिन खत्म हुए, अब जनता का राज है और राजनीति में उसी को जाना चाहिए जिसके भीतर सेवा करने का भाव हो. अब राजनीति को धर्म के अनुसार चलना होगा. बदलते हुए समय में सच्चे, कर्मनिष्ठ और देशभक्त नेता ही राजनीति में सफल हो सकते हैं. कितना विशाल है हमारा देश और कितने भिन्न विचारधारा के लोग यहाँ निवास करते हैं, सभी को खुश करना एक नेता या पार्टी के लिए सम्भव नहीं है, लेकिन लोकतंत्र में जितना हो सके सबको साथ लेकर काम करना होता है. भारत जैसे विशाल देश में जनता भी कितने ही वर्गों में बंटी है, पर लोकतंत्र की कितनी महानता है कि सबके मत की कीमत एक समान है. यहाँ हरेक नागरिक को वोट देने का अधिकार है और अपनी पसंद की सरकार चुनने का भी.

Sunday, March 10, 2019

लोकतंत्र की सदा विजय हो


चुनावों की तिथियाँ घोषित हो चुकी हैं और आचार संहिता भी लागू हो गयी है. उम्मीद की जा सकती है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में हिंसा रहित और निष्पक्ष चुनाव होंगे. एक उत्सव की तरह सारा देश इसमें पूरे मन से भाग लेगा और आने वाले दिनों में समाचार पत्रों व टीवी पर विरोधी पक्ष एक दूसरे के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे. एक सामान्य भारतीय नागरिक होने के नाते इतनी उम्मीद तो रखी जा सकती है कि कोई भी दल आचार संहिता का उल्लंघन नहीं करेगा और देश का वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहेगा. देश के भीतर तथा आदेश के बाहर कुछ ऐसे तत्व हैं जो आपसी विवादों का गलत उपयोग करते हैं, उन्हें इसका अवसर न मिले ऐसा प्रयास हर नागरिक व पार्टी को करना ही चाहिए. कृपया आने वाले चुनावों में अपना मत देकर लोकतंत्र के इस उत्सव में आप सभी सम्मिलित हों.

Sunday, August 5, 2012

हो प्रेय वही जो श्रेय भी हो


जुलाई २००३ 
प्रेय और श्रेय यह दोनों रास्ते जीवन में हर क्षण हमारे सम्मुख आते हैं, हमें हर पल चुनाव करना होता है. जो श्रेष्ठ है यदि उसका चुनाव किया तो हम साधक हैं पर प्रेय के पीछे गए तो अपने पद से नीचे गिर गए. ईश्वर हर क्षण हम पर नजर रखे है, वह हमारे चुनाव में दखलंदाजी नहीं करता, वह द्रष्टा है पर जैसे ही हम श्रेष्ठता का मार्ग चुनते हैं, वह हम पर एक स्नेह भरी मुस्कान छोड़ता है, उसका स्पर्श हम अपनी आत्मा में महसूस करते हैं. जब भी हम अच्छाई के रास्ते पर चलते हैं  आत्मा पुष्ट होती है और जब भी हम तुच्छता को चुनते हैं आत्मा संकुचित होती है. उस पर एक धब्बा लग जाता है. हमें तो इस चादर को ज्यों का त्यों प्रभु को सौंपना है. स्वच्छ, निर्मल और पवित्र और यह कितना सरल है, यह तब सरल हो जाता है जब हम ईश्वर से प्रेम करते हैं, उसके और अपने बीच अहं आड़े नहीं आने देते. उसने हमें अपने सा ही बनाया है. उसी की तरह हमें भी जगत में बाँटना ही बाँटना है. हम में भी अनंत सम्भावनाएं छुपी हैं, साधना उन्हीं को जागृत करती है.