जाने-अनजाने हम सभी अपनी नियति की ओर बढ़ रहे हैं । नियति जो हमने खुद गढ़ी है; हमारे अपने कर्मों द्वारा, कर्म जो हमरी कामनाओं का परिणाम हैं। इस देह, मन, बुद्धि में जो शक्ति निहित है उसे जगाकर आत्मस्वरूप शिव से मिलना एक साधक की नियति है। हमारे भीतर जो ईश्वरीय चेतना है वह अपने मूल स्वरूप से जुड़ना चाहती है। प्रेम की तलाश इसी के कारण है, आनंद, शांति व पूर्णता की तलाश इसी के कारण है। हर व्यक्ति कुछ न कुछ पाना चाहता है ताकि वह पूर्ण हो सके, यह अधूरापन उसे सालता है। यह तलाश तब तक पूरी नहीं होती जब तक आत्मशक्ति अनंत से एकाकार न हो सके। दूसरे अंशों में अनंत का एक अंश होने के कारण हर आत्मा स्वयं की मुक्तता का अनुभव करना चाहती है, जो अभी देह व मन की सीमाओं में रहने के कारण बँधा हुआ महसूस करती है। यदि वह अपने निर्णय पूर्व संस्कारों के कारण न ले, आदतों के कारण न ले, विकारों के कारण न ले, मित्रों, परिवार व समाज के दबाव में न ले, बल्कि अपने कल्याण की भावना से स्वयं के लिए हितकर मार्ग पर चलने का साहस जुटा पाए तो वह अपने लक्ष्य को पा सकती है। अनंतता उसका लक्ष्य है और सीमा उसकी वर्तमान अवस्था, इसे तोड़कर वह अपने पूर्ण सामर्थ्य का अनुभव कर सकती है।
Thursday, December 22, 2022
Thursday, November 24, 2022
श्वास श्वास जब खिल जाएगी
अतीत हमारे वर्तमान में सेंध न लगाए, इसका सदा ध्यान रखना है। परमात्मा जब भी जिसको मिला है, सदा वर्तमान में मिला है। जब हमारा मन अतीत या भविष्य की कल्पना में खोया होता है, वह उस वर्तमान की क़ीमत पर करता है, जो हमें लक्ष्य तक पहुँचा सकता था। साधक का एकमात्र लक्ष्य है अपने भीतर छिपे दिव्य तत्व का आत्मा के रूप में अनुभव करना तथा कण-कण में छिपे देवत्व को पहचान कर जगत के साथ एकत्व का अनुभव करना। हमारा मन इस एकत्व को अनुभव नहीं कर सकता क्योंकि वह सीमित है। मन हमारे विचारों, भावनाओं, आकांक्षाओं का एक पुंज है, बुद्धि अवश्य तर्क के आधार पर जगत की अनंतता को जान सकती है। किंतु बौद्धिक स्तर पर जानने से उस दिव्यता की कल्पना ही की जा सकती है, उसे अस्तित्त्व गत जानना होता है। जिसका अर्थ है, हमारी हर श्वास में वह प्रकट हो, हमारे हर कृत्य, हर विचार में उसकी झलक हो, जो सदा आनन्दमय है, पूर्ण है, प्रेम, शांति, शक्ति और ज्ञान का स्रोत है। जीवन में जब भी इन तत्वों की कमी हो मानना होगा कि हम आत्मा से दूर हैं और अपने लक्ष्य से भी दूर हो रहे हैं।