परमात्मा की बनाई इस सुंदर सृष्टि
में हममें से हरेक को अपनी भूमिका निभानी है. एक ही सत्ता जड़ और चेतन के अनंत-अनंत
रूपों में प्रकट हो रही है. जहाँ सभी किसी न किसी तरह से एक-दूसरे पर निर्भर हैं. गणपति
की लीला भी यही बताती है, उनका वाहन मूषक है, और सर्प को उन्होंने अपने उदर पर
बाँधा हुआ है. मूषक सर्प का आहार है, सर्प मोर का आहार है, जो कार्तिकेय का वाहन
है. वन में सभी जीव एक-दूसरे पर आश्रित हैं. एक समर्थ मानव पर अनेकों जन आश्रित
होते हैं. जिस का हृदय सहज ही अन्यों की सहायता करने के लिए तत्पर हो जाता है, उसे
वैसी सामर्थ्य भी अस्तित्त्व द्वारा मिलने लगती है. साधना में योग, स्वाध्याय, ईश्वर
भक्ति के साथ-साथ सेवा का भी समान महत्व है, बल्कि साधना की सिद्धि के बाद तो सेवा
के अतिरिक्त कुछ करने को भी साधक के पास नहीं रह जाता. गणपति उत्सव में भी अन्य
सामाजिक उत्सवों व पर्वों की तरह समाज के अनगिनत जन किसी न किसी प्रकार की सेवा
देते हैं. अंतर इतना ही है, एक सिद्ध व्यक्ति इस सत्य को जानकर सेवा करता है कि अपने
हर सेवा कर्म में वह परमात्मा की ही सेवा कर रहा है. साधक अपने अहंकार को मिटाने
के लिए सेवा करता है और अज्ञानी व्यक्ति अहंकार के पोषण के लिए सेवा करता है.
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Monday, September 2, 2019
Tuesday, September 11, 2018
विश्वाधारा विनायका
१२ सितम्बर २०१८
जो भी अभाव प्रतीत होता है, वह प्रकृति में है, चैतन्य पूर्ण
है, लेकिन वहाँ सदा नहीं रहा जा सकता. उस पूर्णता को हृदय में भरकर रहना तो इसी
प्रकृति में है. गणेश पूजा का उत्सव इसी बात का स्मरण कराता है. देवता को पूजा के
स्थान पर बैठाकर उसकी आराधना करनी है फिर उससे वरदान पाकर जीवन को भर लेना है और
अंत में देवमूर्ति को भी विसर्जित कर देना है. गणेश शुभता के प्रतीक हैं, ज्ञान और
विवेक के भी. वे विघ्न हर्ता हैं और मंगलकारक भी. हमें अपने जीवन में उनकी
उपस्थिति हर पल चाहिए. शुभ की कामना करते हुए यदि हम ज्ञान धारण करें, वही
मंगलकारी हो सकता है. वास्तविक ज्ञान हमें विनम्र बनाता है. गणपति के हाथ में मोदक
है अर्थात आह्लाद और उल्लास सदा उनके अपने हाथ में है, उसके लिए कहीं जाने की
आवश्यकता नहीं है. जिस दिन हमारा सुख भी सदा अपने पास ही नजर आने लगेगा, उसी दिन
हमें गणपति की पूजा का फल मिला है, ऐसा मानना होगा. गणेश के रूप की हर बात कुछ न
कुछ संदेश अपने पीछे छिपाए है. हमें उन संदेशों को गुनना है और स्वयं तथा जगत के
लिए मंगल कामना करनी है.
Thursday, August 24, 2017
गणपति बप्पा मोरया
२५ अगस्त २०१७
आज गणेश चतुर्थी
है. भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि ! प्रथम पूजनीय गणपति को सम्मानित करने
की तिथि ! गणेश सभी देवताओं में अग्र हैं, वे मूलाधार चक्र के अधिष्ठाता हैं,
विघ्न विनाशक हैं. उनके जन्म और कर्म के साथ कितनी कथाएं जुड़ी हैं, जिनका गहरा
आध्यात्मिक अर्थ संतजन बताते हैं. गणेश भक्तों को अपने लगते हैं, अपने परिवार के
सदस्य की तरह उनकी घर-घर में तथा सार्वजनिक स्थानों पर स्थापना की जाती है. वैसे
तो वर्ष भर ही किसी न किसी रूप में गणेश की पूजा होती है पर आज के दिन विशेष आयोजन
होते हैं. वे ज्ञान और कुशलता के प्रदाता हैं. रिद्धि और सिद्धि को देने वाले हैं.
गणेश तत्व का अर्थ है शुभता और सात्विक शक्ति से ओतप्रोत ज्ञान. जब शुभ और मंगल के
दाता गणेश की पूजा करने वाला स्वयं भी उन गुणों को स्वयं में धारण करता है तभी सही
अर्थों में गणेश चतुर्थी का उत्सव सफल
होता है.
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कुशलता,
गणपति,
गणेश चतुर्थी,
ज्ञान,
डायरी के पन्नों से,
पूजा
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