Sunday, July 2, 2023
गुरु ज्ञान जीवन में आये
Thursday, September 22, 2022
जीवन इक उपहार अनोखा
सेवा के रूप में किए गए कृत्य हमें वर्तमान में बनाए रखते हैं क्योंकि हमें उनसे भविष्य में कुछ भी पाने की चाह नहीं होती। जब हम जीवन को साक्षी भाव से देखते हैं तो चीजें स्पष्ट दिखायी देती हैं। जितना हम सामान्य बातों से ऊपर उठ जाते हैं तो वे बातें जो पहले बड़ी लगती थीं, अपना महत्व खो देती हैं। हमें यह जीवन उपहार स्वरूप दिया गया है, मन में इसके लिए अस्तित्त्व के प्रति कृतज्ञता जगे तो कभी किसी अभाव का अनुभव नहीं होता। नियमित साधना, सेवा तथा जाप करने से मन तृप्त रहता है। जितना-जितना हम साधना के लिये समर्पित होंगे, आंतरिक ऊर्जा बढ़ती रहेगी और सहज उत्साह बना रहेगा। ऐसी स्थिति में हमारा हर कार्य भीतर के आनंद की अभिव्यक्ति के लिए होगा न कि भविष्य में आनंद पाने की लालसा में किया गया होगा। इसके लिए समय का उचित प्रबंधन और हर क्षेत्र में संयमित रहना है। संबंधों में मधुरता तभी बनी राह सकती है जब वे प्रेम बाँटने के लिए बने हों न कि प्रेम की माँग करने के लिए।
Monday, March 29, 2021
सत की नाव खेवटिया सदगुरू
हर वह कर्म जो निज सुख की चाह में किया जाता है, हमें बांधता है. जो स्वार्थ पर आधारित हों वे संबंध हमें दुःख देने के कारण बनते हैं. जब हम अपना सुख भीतर से लेने लगते हैं तब स्वार्थ उसी तरह झर जाता है जैसे पतझड़ में पत्ते, तभी जीवन में सेवा और प्रेम की नयी कोंपलें फूटती हैं. जब संबंधों का आधार प्रेम हो तभी उनकी ख़ुशबू जीवन को महका देती है. रजस हमें अपने ही सुख की चिंता करना सिखाता है, तमस उसके लिए असत्य का सहारा लेने से भी नहीं झिझकता. सत का पदार्पण ही ज्ञान की मशाल लेकर वास्तविकता का परिचय कराता है. जीवन में सत्व की वृद्धि करनी हो तो सत्संग उसकी पहली सीढ़ी है. शास्त्रों का अध्ययन व नियमित साधना उसके सिद्ध मार्ग हैं. सत्व हमें अपने आप से जोड़े रखता है. यह अनावश्यक कर्मों से हमने बचाता है और कर्म हीनता से भी दूर रखता है. सत ही आत्मबल और मेधा को बढ़ाता है.
